रेयर अर्थ मैग्नेट के घरेलू निर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार बड़ी योजना लेकर आ रही है। भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने आज बताया कि सरकार ने 1345 करोड़ रुपए की सब्सिडी स्कीम का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत चुनिंदा कंपनियों को एंड-टू-एंड प्रोसेसिंग के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह स्कीम अभी इंटर मिनिस्ट्रियल चर्चा के स्तर पर है। इससे रेयर अर्थ एंड-टू-एंड प्रोसेसिंग को ही लाभ मिलेगा। रेयर अर्थ मैग्नेट पर सरकार की नई इंसेंटिव स्कीम के तहत निजी और सरकारी दोनों कंपनियां पात्र होंगी।
कुमारस्वामी ने कहा, "रेयर अर्थ मैग्नेट के उत्पादको के लिए 1,345 करोड़ रुपये की सब्सिडी हेतु एक योजना पेश की गई है। यह वर्तमान में इंटर मिनिस्ट्रियल परामर्श के अधीन है। यह प्रस्तावित है कि अभी दो निर्माता होंगे, हालांकि योजना तैयार होने तक इसमें बदलाव हो सकता है।"
भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव कामरान रिज़वी ने कहा कि वे उत्पादक इस सब्सिडी के पात्र होंगे जो रेयर अर्थ ऑक्साइड से लेकर मैग्नेट तक की प्रोसेसिंग करते हैं। प्रस्तावित योजना में निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों, दोनों को शामिल किए जाने की उम्मीद है, जो पूरे वैल्यू चेन में घरेलू क्षमता को मजबूत करने में योगदान देंगे।
बता दें कि करीब 95 फीसदी रेयर अर्थ मैगनेट का आयात चीन से होता है। चीन के प्रतिबंध से निपटने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार इंसेंटिव स्कीम लाने की तैयारी कर रही है।
रेयर अर्थ मैग्नेट का ऑटो सहित कई इंडस्ट्री में इस्तेमाल होता है। इसकी कमी से ऑटो इंडस्ट्री ही नहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री भी प्रभावित हो सकती है। रेयर अर्थ मैग्नेट का इस्तेमाल स्पीकर बनाने के लिए होता है। अब होम थिएटर, हेडफोन, ईयर बड्स और TV जैसे उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। चीन के रेयर अर्थ मेगनेट के निर्यात पर रोक लगाने के बाद आटो इंडस्ट्री के साथ साथ इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर भी चिंता में है। ये इंडस्ट्री काफी हद तक रेयर अर्थ मेगनेट पर निर्भर रहती है। इलेक्ट्रिक मोटर और सेंसर जैसे डिवाइस में भी इसका इस्तेमाल होता है। इन चीजों के बिल्ट ऑन मैटेरियल लागत का 5-7 फीसदी तक हिस्सा रेयर अर्थ मैग्नेट का होता है।
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