6 Ghz के डी-लाइसेंस स्पेक्ट्रम बैंड में हाई पावर इक्विपमेंट लगाने की संभावनाएं तलाशने के लिए दूरसंचार विभाग ने इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी का गठन किया है। तीन विभागों की कमेटी 1 महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी। इसका फायदा क्या होगा यह पूरी खबर बताते हुए सीएनबीसी-आवाज संवाददाता असीम मनचंदा ने कहा कि सरकार ने 6 Ghz बैंड को डी-लाइसेंस कर दिया है। 15 अगस्त तक सरकार इसके नियम जारी करेगी। सरकार के इस कदम के बाद अब कंपनियां इसमें हाई-पावर इक्विपमेंट लगाना चाहती हैं। कंपनियां सरकार से बड़े इक्विपमेंट लगाने की मंजूरी मांग रही हैं।
इस मांग पर विचार करने के लिए दूरसंचार विभाग ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल कमेटी बनाई है। इस कमेटी में दूरसंचार विभाग और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सदस्य शामिल होंगे। कमेटी केबल और सेटेलाइट सेवाओं से इंटरफ्रेंस पर रिपोर्ट देगी। कमेटी 1 महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी।
इसका क्या होगा फायदा
बता दें की हाल ही में सरकार ने 6 Ghz स्पेक्ट्रम बैंड के डी-लाइसेंस का फैसला लिया है। इसके लिए सरकार अंतिम नियम अगले महीने जारी करेगी। 6 Ghz स्पेक्ट्रम के डी लाइसेंस का मतलब ये है कि अब कोई भी इसका इस्तेमाल कर सकेगा, इसके इस्तेमाल उसे कोई मंजूरी नहीं लेनी होगी। दूसरी तरफ कंपनियां इस बात की मांग कर रही हैं कि उन्हें 6 Gh स्पेक्ट्रम बैंड में हाई पावर इक्विपमेंट लगाने की मंजूरी मिलनी चाहिए। ऐसे इक्विपमेंट लगने से 5जी की स्पीड काफी ज्यादा बढ़ सकती है। इस मांग का समीक्षा के के लिए बनाई गई कमेटी ये देखेगी कि अगर हाई पावर इक्विपमेंट लगाए जाते हैं तो क्या इससे दूसरी सेवाएं प्रभावित होंगी या नहीं। कमेटी हाई पावर इक्विपमेंट के केबल और सेटेलाइट सेवाओं पर असर जांच करेगी और अपनी राय देगी।
6 गीगाहर्ट्ज़ बैंड ( 6 Ghz स्पेक्ट्रम बैंड) में 5G और वाई-फ़ाई, दोनों के विस्तार की बहुत व्यापक संभावनाएं है। यह न्यूनतम लेटेंसी (विलंबता) के साथ बड़ी मात्रा में सिग्नलों की सटीक स्थिति को सपोर्ट करता है, जिससे यह हाई स्पीड कनेक्टिविटी अप्लीकेशनों के लिए बेहतर साबित होता है।
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