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रतन टाटा के युवा दोस्त शांतनु नायडू को Tata Motors में मिली बड़ी जिम्मेदारी, लिंक्डइन पर बांटी खुशी

रतन टाटा 9 अक्टूबर, 2024 को 86 वर्ष की उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गए। ऐसी रिपोर्ट्स हैं कि रतन टाटा ने वसीयत में स्टार्टअप गुडफैलोज में अपनी कुछ हिस्सेदारी शांतनु नायडू के नाम की है। साल 2018 में नायडू ने रतन टाटा के असिस्टेंट के तौर पर काम करना शुरू किया

Edited By: Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Feb 05, 2025 पर 9:35 AM
रतन टाटा के युवा दोस्त शांतनु नायडू को Tata Motors में मिली बड़ी जिम्मेदारी, लिंक्डइन पर बांटी खुशी
शांतनु नायडू ने इंजीनियरिंग इंटर्न के तौर पर टाटा ग्रुप को जॉइन किया था।

रतन टाटा के युवा दोस्त शांतनु नायडू (Shantanu Naidu) को अब टाटा मोटर्स में एक बड़ी जिम्मेदारी मिली है। वह कंपनी में जनरल मैनेजर और स्ट्रैटेजिक इनीशिएटिव्स के हेड बन गए हैं। इस बारे में नायडू ने लिंक्डइन पोस्ट के जरिए जानकारी दी। नायडू, रतन टाटा के बेहद करीबी और भरोसेमंद दोस्त थे। शांतनु ने एक लिंक्डइन पोस्ट में लिखा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मैं टाटा मोटर्स में जनरल मैनेजर, हेड- स्ट्रैटेजिक इनीशिएटिव्स के तौर पर एक नया पद संभाल रहा हूं। मुझे याद है जब मेरे पिता टाटा मोटर्स प्लांट से सफेद शर्ट और नेवी कलर का पैंट पहनकर घर आते थे और मैं खिड़की पर उनका इंतजार करता था...'

नायडू ने इंजीनियरिंग इंटर्न के तौर पर टाटा ग्रुप को जॉइन किया था। उनकी और रतन टाटा की दोस्ती जानवरों के लिए उनके साझा प्रेम से पनपी। 2014 में पुणे में टाटा एलेक्सी में ऑटोमोबाइल डिजाइन इंजीनियर के रूप में काम करते वक्त नायडू ने कुछ ऐसा देखा, जो उन्हें अंदर तक कचोट गया। वह था- सड़क पर एक मरा हुआ आवारा कुत्ता। इस घटना ने उनके अंदर जिम्मेदारी की भावना जगाई, जिसके कारण उन्होंने आवारा कुत्तों को रात में गाड़ियों की चपेट में आने से बचाने के लिए रिफ्लेक्टिव कॉलर बनाए।

ऐसे मिला रतन टाटा का साथ

अपने इनोवेटिव डॉग कॉलर की बढ़ती मांग के बावजूद शांतनु नायडू को फंडिंग की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अपने पिता से प्रोत्साहित होकर, उन्होंने पशु प्रेमी रतन टाटा को एक लेटर लिखा। उन्हें आश्चर्य हुआ जब टाटा ने दो महीने बाद जवाब दिया और नायडू को अपने मुंबई ऑफिस में व्यक्तिगत रूप से मिलने के लिए बुलाया। इस मुलाकात ने एक गहरी और स्थायी दोस्ती की शुरुआत की नींव रखी। टाटा, नायडू की कोशिशों से बेहद प्रभावित थे। मुलाकात के बाद उन्होंने नायडू को अपने घर बुलाया।

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