महंगाई दर को 6% से नीचे लाकर मॉनिटरी पॉलिसी ने पूरा किया अपना पहला लक्ष्य: RBI Bulletin

RBI Bulletin के मुताबिक, महंगाई दर तय लिमिट के दायरे में आ रहा है और प्रमुख संकेतकों से पता चलता है कि देश का चालू खात घाटा भी वित्त वर्ष 2023 के बाकी हिस्सों में कम होने के रास्ते पर है। इससे भारतीय इकोनॉमी की आर्थिक स्थिरता में सुधार देखा गया है

अपडेटेड Jan 19, 2023 पर 7:49 PM
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गुरुवार 19 जनवरी को अपना मासिक बुलेटिन जारी किया

RBI Bulletin: देश की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने हाल के महीनों में खुदरा मंहगाई दर को 6 फीसदी से नीचे लाकर अपने पहले लक्ष्य को पार कर लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आज 19 जनवरी को जारी मासिक बुलेटिन में यह कहा गया है। बुलेटिन के मुताबिक, महंगाई दर तय लिमिट के दायरे में आ रहा है और प्रमुख संकेतकों से पता चलता है कि देश का चालू खात घाटा भी वित्त वर्ष 2023 के बाकी हिस्सों में कम होने के रास्ते पर है। इससे भारतीय इकोनॉमी की आर्थिक स्थिरता में सुधार देखा गया है।

शेयर बाजार बेसब्री से मॉनिटरी पॉलिसी को लेकर RBI के रुख का इंतजार कर रहा है। ऐसे में बुलेटिन की ये टिप्पणियां अहम हो जाती हैं। RBI बुलेटिन, केंद्रीय बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करती हैं, लेकिन इकोनॉमी और मॉनिटरी पॉलिसी के विभिन्न पहलुओं पर RBI के सोच को लेकर इससे अहम संकेत मिलते हैं।

सरकार ने RBI को जिम्मेदारी दी है कि वह खुदरा महंगाई दर को 2 से 6 फीसदी के बीच में रखे हैं। हालांकि साल 2022 में अधिकतर समय महंगाई दर इस तय लिमिट के ऊपर रही। लेकिन पिछले 2 महीनों से महंगाई दर 6 फीसदी से नीचे आई है, जिससे RBI को कुछ राहत मिली।


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भारत सरकार की ओर से बीते 12 जनवरी को जारी आंकड़ों के मुताबित, दिसंबर महीने में खुदरा महंगाई दर 5.72 प्रतिशत रही, जो पिछले एक सालों का इसका सबसे निचला स्तर है। इससे पहले नवंबर 2022 में खुदरा महंगाई दर 5.88 फीसदी रही थी। इसके अलावा यह लगातार तीसरा महीना था जब महंगाई दर में गिरावट आई।

2027 में भारत बनेगा 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी

बुलेटिन के अनुसार, भारत की जीडीपी (GDP) ग्रोथ रेट वित्त वर्ष घटकर 6.5 फीसदी रह सकती है, जबकि वित्त वर्ष 2023 में इसके 7 फीसदी रहने का अनुमान है। मौजूदा प्राइस और एक्सचेंज रेट, भारत की इकोनॉमी वित्त वर्ष 2023 के अंत में 3.7 ट्रिलियन डॉलर की होगी। वहीं 2027 तक इसके बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर के होने का अनुमान है। 1 ट्रिलियन में 1 लाख करोड़ डॉलर होते हैं।

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