RBI ने लोन अकाउंट्स पर पेनाल्टी के नियमों में किए बदलाव, जानिए क्या है इसका मतलब

केंद्रीय बैंक ने 18 अगस्त को कहा कि बैंक अपने रेवेन्यू को बढ़ाने के लिए लोन अकाउंट्स पर जुर्माना नहीं लगा सकते। लोन के ग्राहकों के कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के उल्लंघन पर बैंक उन पर जुर्माना लगाते हैं

अपडेटेड Aug 18, 2023 पर 10:34 AM
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RBI ने यह भी कहा है कि बैंकों को नियमों के उल्लंन पर लगाई गई पेनाल्टी को 'पेनल चार्ज' की कैटेगरी में रखना चाहिए न कि इसे पेनल इंटरेस्ट मानना चाहिए।

RBI ने लोन अकाउंट्स पर जुर्माना लगाने के नियमों में बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक ने 18 अगस्त को कहा कि बैंक अपने रेवेन्यू को बढ़ाने के लिए लोन अकाउंट्स पर जुर्माना नहीं लगा सकते। लोन के ग्राहकों के कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के उल्लंघन पर बैंक उन पर जुर्माना लगाते हैं। RBI ने यह भी कहा है कि बैंकों को नियमों के उल्लंन पर लगाई गई पेनाल्टी को 'पेनल चार्ज' की कैटेगरी में रखना चाहिए न कि इसे पेनल इंटरेस्ट मानना चाहिए। पेनल इंटरेस्ट बैंकों के लोन पर इंटरेस्ट से होने वाली कमाई में जुड़ जाता है।

केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि पेनल चार्जेज का कैपिटलाइजेशन नहीं होना चाहिए। इसका मतलब है कि इस तरह के चार्ज पर फिर से इंटरेस्ट का कैलकुलेशन नहीं होना चाहिए। ऐसा करने से लोन अकाउंट में इंटरेस्ट के कंपाउंडिंग के सामान्य प्रोसिजर पर असर नहीं पड़ेगा। RBI ने यह पाया था कि कई बैंक अप्लिकेबल इंटरेस्ट रेट्स पर पेनल रेट ऑफ इंटरेस्ट लगा रहे हैं। ऐसा ग्राहक के लोन पर डिफॉल्ट करने या लोन की शर्तों के उल्लंघन पर किया जाता है।

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केंद्रीय बैंक ने कहा है कि हालांकि पेनल इंटरेस्ट लगाने का मकसद ग्राहकों में लोन के रिपेमेंट में अनुशासन लाना है। लेकिन, सुपरवायजरी रिव्यू से यह पता चला है कि बैंक इस बारे में अलग-अलग तरह के प्रैक्टिसेज का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे चार्ज लगाने का मकसद रेवेन्यू को बढ़ाना नहीं होना चाहिए। साथ ही इंटरेस्ट लोन की शर्त में बताए गए इंटरेस्ट से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

RBI का यह कदम बहुत अहम माना जा रहा है, क्योंकि कई ग्राहकों ने बैंक के पेनाल्टी लगाने में पारदर्शिता के अभाव की शिकायतें की हैं। केंद्रीय बैंक ने पूरी स्थिति पर गौर करने के बाद बैंकों से यह कहा है कि उन्हें रेट ऑफ इंटरेस्ट को लेकर किसी तरह के नए कंपोनेंट की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। उन्हें हर तरह से इन गाइडलाइंस के पालन की कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा बैंकों को पेनल चार्जेज या लोन पर इस तरह की पेनाल्टी के लिए बोर्ड के एप्रूवल से पॉलिसी बनानी चाहिए।

RBI ने 18 अगस्त को कहा, "पेनल चार्ज की क्वानटिटी उचित होनी चाहिए और यह लोन की शर्तों के उल्लंघन के हिसाब से होनी चाहिए। किसी खास लोन/प्रोडक्ट कैटेगरी" के अंदर इस मामले में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। केंद्रीय बैंक ने एक और अहम बात यह कही है कि इंडिविजुअल ग्राहकों को दिए गए लोन के मामले में पेनल चार्जेज नॉन-इंडिविजुअल ग्राहकों के पेनल चार्जेज से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

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