आरबीआई ने इस हफ्ते अपनी मॉनेटरी पॉलिसी में लगातार 10वीं बार रेपो रेट में बदलाव नहीं किया। ऐसे में नजरें दिसंबर की आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी पर टिक गई हैं। सवाल है कि क्या केंद्रीय बैंक दिसंबर में इंटरेस्ट रेट घटाएगा? दिसंबर में इंटरेस्ट रेट में कमी पर संदेह के बादल अक्टूबर की पॉलिसी के वोटिंग पैटर्न की वजह से पैदा हुए। मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की अक्टूबर की मीटिंग में जो वोटिंग पैटर्न दिखा, वह अगस्त के वोटिंग पैटर्न से काफी अलग था।
अक्टूबर की मीटिंग में वोटिंग पैटर्न में बदलाव
अक्टूबर की MPC की बैठक में पांच सदस्यों ने रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। सिर्फ एक सदस्य ने रेपो रेट घटाने के प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। एमपीसी में कुल छह सदस्य होते हैं। अभी यह पता नहीं चला है कि जिस सदस्य ने रेपो रेट में कमी के पक्ष में मतदान किया, उसका नाम क्या है। RBI के एमपीसी की मीटिंग के मिनट्स जारी करने के बाद ही यह जानकारी मिल पाएगी। अगस्त में एमपीसी की मीटिंग में चार सदस्यों ने रेपो रेट में किसी तरह का बदलाव नहीं करने के पक्ष में मतदान किया था। अशिमा गोयल और जयंत आर वर्मा का मानना था कि रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कमी होनी चाहिए।
रिटेल इनफ्लेशन कंट्रोल में रहने पर घट सकता है इंटरेस्ट रेट
मनीकंट्रोल ने इस बारे में एक्सपर्ट्स की राय जानने की कोशिश की। उनका कहना था कि इस बार वोटिंग पैटर्न में बदलाव के बावजूद आरबीआई की दिसंबर की मॉनेटरी पॉलिसी में एमपीसी इंटरेस्ट रेट में कमी करने का फैसला लेगी। उनका कहना था कि अगर रिटेल इनफ्लेशन कंट्रोल में बना रहता है और इकोनॉमी से जुड़े डेटा पॉजिटिव आते हैं तो केंद्रीय बैंक अनुमान से पहले इंटरेस्ट रेट में कमी कर सकता है।
आरबीआई ने रिटेल इनफ्लेशन का अनुमान बढ़ाया
HDFC Bank की इकोनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता ने कहा, "दिसंबर में इंटरेस्ट रेट में कमी की संभावना खारिज नहीं की जा सकती। हालांकि, आरबीआई डेटा के हिसाब से फैसले लेगा। अगर इंडियन इकोनॉमी की स्थिति ठीक रहती है तो केंद्रीय बैंक जल्द इंटरेस्ट रेट घटा सकता है। अनुमान है कि इनफ्लेशन इस फाइनेंशियल ईयर की चौथी तिमाही में 4 फीसदी के करीब रहेगा।" अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी की बैठक में आरबीआई ने तीसरी तिमाही में रिटेल इनफ्लेशन का अनुमान बढ़ा दिया।
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इनफ्लेशन में फिर से दिख सकती है तेजी
एचडीएफसी बैंक की इकोनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता ने कहा कि शॉर्ट टर्म में इनफ्लेशन आउटलुक अनिश्चित दिख रहा है। सितंबर में इनफ्लेशन अनफेवरेबल बेस इफेक्ट की वजह से ज्यादा रह सकता है। उधर, अगर दुनिया में कमोडिटी की कीमतों में तेजी आती है और मौसम की स्थितियां अनुकूल नहीं रहती हैं तो एक बार फिर से इनफ्लेशन पर दबाव बढ़ जाएगा। ऐसे में आरबीआई के अगले साल की शुरुआत में ही इंटरेस्ट रेट में कमी की उम्मीद लगाई जा सकती है।