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RBI MPC: बढ़ती महंगाई के बीच आरबीआई की आज 4 दिसंबर से अहम बैठक, जानें आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर?

RBI MPC Meeting December 2024: आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन-दिवसीय बैठक आज 4 दिसंबर से शुरू हो चुकी है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास शुक्रवार 6 दिसंबर को, इस मीटिंग के नतीजों का ऐलान करेंगे। आइए जानते हैं कि इस बैठक से दलाल स्ट्रीट क्या उम्मीदें हैं, कौन-कौन सी चुनौतियां RBI के सामने हैं, और इससे आपकी जेब पर क्या असर पड़ सकता है?

Moneycontrol Newsअपडेटेड Dec 04, 2024 पर 1:37 PM
RBI MPC: बढ़ती महंगाई के बीच आरबीआई की आज 4 दिसंबर से अहम बैठक, जानें आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर?

RBI MPC Meeting December 2024: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक आज 4 दिसंबर से शुरू हो चुकी है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास शुक्रवार 6 दिसंबर को, इस बैठक के नतीजों का ऐलान करेंगे। हालांकि अधिकतर एनालिस्ट्स पहले ही यह अनुमान जता चुके हैं कि RBI इस बैठक में एक बार फिर ब्याज दरों को यथावत बनाए रखने का फैसला कर सकता है। यानी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। आइए समझने की कोशिश करते हैं शेयर मार्केट को इस बैठक से क्या उम्मीदें हैं? RBI के सामने क्या-क्या चुनौतियां हैं? और सबसे जरूरी बात, इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ सकता है?

महंगाई बनी हुई है बड़ी चुनौती

महंगाई इस समय RBI के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है। महंगाई को काबू करना आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की पहली प्राथमिकता है। सरकार ने RBI को निर्देश दिया है कि वो कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स आधारित (CPI) खुदरा महंगाई दर को 4% पर बनाकर रहे। इसमें 2 फीसदी तक के उतार-चढ़ाव की इजाजत है। यानी महंगाई दर को 2 से 6% रखने का निर्देश है। लेकिन अभी स्थिति अलग है। अक्टूबर 2024 में महंगाई दर 6.21% दर्ज की गई, जो आरबीआई की टॉलरेंस लिमिट से भी ऊपर है। खासतौर से खाने-पीने से जुड़ी चीजों की महंगाई ने इंफ्लेशन रेट को ऊपर बनाकर कर रखा हुआ है।

इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि आरबीआई वित्त वर्ष 2025 के लिए महंगाई का अनुमान 4.5% से बढ़ाकर 4.8% कर सकता है। RBI गवर्नर शशिकांत दास पहले ही यह स्पष्ट कर चुके हैं कि महंगाई के इस स्तर पर ब्याज दरों में कटौती करना सही कदम नहीं होगा। उन्होंने अक्टूबर में ब्लूमबर्ग को दिए एक बयान में कहा था, "अगर महंगाई 5.2% है और अगली दर भी ऊंची रहने की उम्मीद है, तो दरों में कटौती करना जल्दबाजी होगी।"

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