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MSMEs को सही समय पर भुगतान के लिए 1 अप्रैल से लागू हो इनकम टैक्स का नियम

सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSME) को समय पर भुगतान के लिए इनकम टैक्स का नियम 1 अप्रैल से लागू होगा। इसके तहत कंपनियां अगर वस्तुओं और सेवाओं की सप्लाई के लिए MSME को 45 दिनों में भुगतान नहीं करती हैं, तो वे भुगतान पर टैक्स कटौती का दावा नहीं कर सकेंगी यानी उन्हें ज्यादा टैक्स का भुगतान करना होगा

MoneyControl Newsअपडेटेड Mar 31, 2024 पर 9:04 PM
MSMEs को सही समय पर भुगतान के लिए 1 अप्रैल से लागू हो इनकम टैक्स का नियम
भारतीय निर्यातकों ने सरकार से अनुरोध किया है कि उन्हें सूक्ष्म और लघु उद्यमों से खरीदे गए सामान के लिए 45 दिन के भीतर भुगतान नियम से छूट दी जाए।

सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (MSME) को समय पर भुगतान के लिए इनकम टैक्स का नियम 1 अप्रैल से लागू होगा। इसके तहत कंपनियां अगर वस्तुओं और सेवाओं की सप्लाई (goods and services supply) के लिए MSME को 45 दिनों में भुगतान नहीं करती हैं, तो वे भुगतान पर टैक्स कटौती का दावा नहीं कर सकेंगी यानी उन्हें ज्यादा टैक्स का भुगतान करना होगा।

फाइनेंस एक्ट 2023 के जरिये पेश आयकर कानून की धारा 43 बी (एच) के मुताबिक अगर कोई बड़ी कंपनी MSME को समय पर भुगतान नहीं करती है (लिखित समझौतों के मामले में 45 दिनों के भीतर) तो वह उस खर्च को अपनी टैक्स योग्य आय से नहीं काट सकती है। इससे उन्हें ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है।

कुछ उद्योग संगठनों ने सरकार से नए भुगतान नियमों के अमल को स्थगित करने का अनुरोध किया है। फेडरेशन ऑफ इंडियन माइक्रो एंड स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (FISME) का कहना कि नए नियम में MSME के लिए पासा पलटने वाला बनने की क्षमता है। MSME को डर है कि इस प्रावधान के कारण, बड़े खरीदार MSME आपूर्तिकर्ताओं के प्रति उदासीन हो सकते हैं। वे या तो उन MSME से खरीदारी शुरू कर सकते हैं जो उद्यम के साथ रजिस्टर्ड नहीं हैं या फिर गैर-MSME से जरूरत का सामान ले सकते हैं।

FISME ने स्वीकार किया कि धारा 43बी(एच) ने MSME और बड़े व्यवसायों दोनों के बीच कुछ आशंकाएं पैदा की हैं। हालांकि ऐसी आशंकाएं निराधार हैं। उद्योग संगठन ने कहा, 'भरोसेमंद सप्लायर्स को सिर्फ इसलिए बदलना क्योंकि एक बड़ी कंपनी उन्हें समय पर भुगतान नहीं करना चाहती है, हास्यास्पद है। किसी भी स्थिति में इस तरह की देरी पर सप्लायर्स को भुगतान के मामले में टैक्स अगले साल एडजस्ट किया जा सकता है। यह कमर्शियल गतिविधियों में अनुशासन सुनिश्चित होगा। FISME ने कहा कि दूसरी ओर आशंकाओं के बावजूद, धारा 43बी (एच) में MSME के लिए पासा पलटने वाला बनने की क्षमता है। इसमें कहा गया है कि MSME को तेजी से भुगतान मिलेगा, जो उनकी वित्तीय स्थिति और विकास के लिए अहम है।

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