सिक्योर्ड लोन क्या है? ये कैसे काम करता है और किन बातों का रखना चाहिए ध्यान

सिक्योर्ड लोन में एसेट गिरवी रखा जाता है, जिससे ब्याज दर सस्ती और लोन अमाउंट ज्यादा मिलता है. हालांकि, अगर रिपेमेंट में चूक होती है, तो आप एसेट गवां भी सकते हैं.

अपडेटेड Feb 03, 2026 पर 5:43 PM

लोन एक ऐसा फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति या बिजनेस किसी भी जरूरत के लिए पैसे उधार ले सकता है. इनमें घर खरीदना, पढ़ाई का खर्च उठाना और बिजनेस ग्रोथ जैसी जरूरतें शामिल हैं. इसमें उधार लेने वाला पूरा पैसा एक-साथ चुकाने के बजाय तय EMIs में धीरे-धीरे (ब्याज सहित) चुकाता है.

भले ही लोन से फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है, लेकिन इसे लेने से पहले उसकी शर्तों, ब्याज दरों और रिपेमेंट की समय-सीमा को अच्छी तरह समझ लेना जरूरी है ताकि बाद में कोई परेशानी न हो.

लोन को मुख्य रूप से दो कैटेगरी में बांटा गया है, जिनमें सिक्योर्ड और अनसिक्योर्ड लोन शामिल हैं. फर्क बस इतना है कि सिक्योर्ड लोन के लिए आपको कोई एसेट गिरवी रखना पड़ता है. 

सिक्योर्ड लोन क्या है?


सिक्योर्ड लोन वह लोन होता है, जिसमें उधार लेने के लिए कोई संपत्ति या एसेट (जैसे कि घर, गाड़ी या नकद राशि) गिरवी रखनी होती है.

जब लोन अमाउंट ज्यादा हो या आपका क्रेडिट स्कोर कमजोर हो, तो बैंक या NBFC गारंटी के तौर पर कोई एसेट मांगते हैं. ऐसा करने से उनका रिस्क कम होता है और इसलिए वे ऐसे लोन सस्ती ब्याज दर पर देते हैं. दूसरी ओर, खराब क्रेडिट स्कोर के मामले में पर्सनल लोन पर ब्याज दर ज्यादा होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. दरअसल, पर्सनल लोन अनसिक्योर्ड कैटेगरी में आता है.

आजकल डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की मदद से लोन लेना काफी आसान हो गया है. उदाहरण के तौर पर, आप मनीकंट्रोल की वेबसाइट या ऐप पर जाकर अलग-अलग बैंकों के पर्सनल लोन ऑफर देख सकते हैं. यहां ब्याज दरें 10.5% सालाना से शुरू होती हैं और आप 50 लाख रुपए तक का लोन पूरी तरह डिजिटल तरीके से पा सकते हैं.

सिक्योर्ड लोन के फीचर 

  • इसमें कोई एसेट गिरवी रखा जाता है, जो फिजिकल (जैसे प्रॉपर्टी, व्हीकल) या लिक्विड (जैसे कैश) हो सकता है.

  • पर्सनल और बिजनेस दोनों तरह के लोन सिक्योर्ड हो सकते हैं. बिजनेस लोन में पर्सनल गारंटी भी मांगी जा सकती है. 

  • बैंक, क्रेडिट यूनियन और ऑनलाइन लेंडर सिक्योर्ड लोन ऑफर करते हैं.

  • ब्याज दरें, फीस और शर्तें आपकी प्रोफाइल और लेंडर के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं.

सिक्योर्ड लोन के प्रकार

  • मॉर्गेज/होम लोन: घर खरीदने या रेनोवेशन के लिए, जहां प्रॉपर्टी गिरवी रखी जाती है।

  • व्हीकल लोन: कार, बाइक या कमर्शियल व्हीकल के लिए, जिसमें वही व्हीकल सिक्योरिटी होता है.

  • लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी: किसी भी जरूरत के लिए अपनी रियल एस्टेट प्रॉपर्टी गिरवी रखकर लोन लेना.

  • गोल्ड लोन: सोने के गहने या सिक्के गिरवी रखकर छोटा लोन लेना.

  • सिक्योर्ड क्रेडिट कार्ड: फिक्स्ड डिपॉजिट के आधार पर मिलने वाला क्रेडिट कार्ड, जिससे क्रेडिट स्कोर सुधारा जा सकता है.

  • सिक्योर्ड पर्सनल लोन: अपनी ज्वेलरी, व्हीकल या इन्वेस्टमेंट को गिरवी रखकर पर्सनल जरूरतों के लिए लोन.

  • सिक्योर्ड बिजनेस लोन: बिजनेस के लिए लिया जाने वाला लोन, जिसमें मशीनरी, इन्वेंटरी या प्रॉपर्टी गिरवी रखी जाती है.

  • शेयर-सिक्योर्ड या सेविंग्स-सिक्योर्ड लोन: सेविंग अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉजिट के बदले लोन.

  • पॉन्स शॉप लोन: छोटे लोन, जिसमें गहने या इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी चीजें गिरवी रखी जाती हैं.

  • लाइफ इंश्योरेंस लोन: लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी की वैल्यू के आधार पर लोन.

  • सिक्योर्ड लाइन ऑफ क्रेडिट: प्रॉपर्टी या सेविंग्स के आधार पर मिलने वाली रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा.

50 लाख तक पर्सनल लोन लें

सिक्योर्ड लोन के लिए कैसे अप्लाई करें

  1. बैंक की ब्रांच, वेबसाइट या ऐप पर जाएं.

  1. लोन एप्लीकेशन फॉर्म भरें.

  1. KYC डॉक्यूमेंट (आधार, PAN आदि) सबमिट करें.

  1. इनकम प्रूफ दें ताकि लेंडर को आपकी रिपेमेंट क्षमता का पता चले.

  1. जरूरत के अनुसार दूसरे डॉक्यूमेंट दें.

  1. अगर सब कुछ सही हो, तो वेरिफिकेशन के बाद तुरंत लोन मिल सकता है.

सिक्योर्ड लोन के लिए एलिजिबिलिटी शर्तें 

  • एप्लिकेंट भारत का निवासी हो और उम्र 18 साल या उससे ज्यादा हो.

  • एप्लिकेंट सैलरीड, सेल्फ एम्प्लॉयड, बिजनेस ओनर, NRI, NRO, NRE, किसान या HUF हो.

  • सालाना इनकम कम से कम 3 लाख रुपए हो (लेंडर के अनुसार बदल सकती है).

  • एप्लिकेंट के पास लोन अमाउंट के बराबर या उससे ज्यादा कीमत का एसेट हो.

  • अच्छा क्रेडिट स्कोर हो (जितना बेहतर स्कोर, उतने ज्यादा चांस).

  • बिजनेस लोन के लिए कंपनी कम से कम तीन साल से मुनाफा कमा रही हो.

जरूरी डॉक्यूमेंट

  • होम लोन: ID प्रूफ, इनकम प्रूफ, प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट और बैंक स्टेटमेंट

  • कार लोन: ID प्रूफ, लीगल ऐज का प्रूफ, इनकम प्रूफ और बैंक स्टेटमेंट

  • बिजनेस लोन: कंपनी की प्रोफाइल, प्रमोटर की जानकारी, ऑडिटेड बैलेंस शीट और ID/एड्रेस के डॉक्यूमेंट

हालांकि, डॉक्यूमेंट का क्राइटेरिया अलग-अलग लेंडर के हिसाब से अलग हो सकता है. 

सिक्योर्ड लोन: फायदे और नुकसान

फायदे:

  • कम ब्याज दर: एसेट गिरवी रखने से ब्याज दरें कम होती हैं.

  • ज्यादा लोन अमाउंट: बैंकों के लिए रिस्क कम होने से ज्यादा लोन अमाउंट मिल सकता है.

  • बेहतर शर्तें: जल्दी अप्रूवल, कम फीस और आसान प्रोसेसिंग.

  • फ्लेक्सिबिलिटी: EMI टर्म चुन सकते हैं और प्रीपेमेंट कर सकते हैं.

  • कम क्रेडिट स्कोर में भी संभव: एसेट गिरवी रखने से, कम क्रेडिट स्कोर में भी अप्रूवल आसानी से मिल सकता है. 

  • टैक्स में छूट: कुछ सिक्योर्ड लोन (जैसे होम लोन) पर टैक्स बेनिफिट.

  • कम इनकम पर भी लोन: इनकम से जुडी शर्तों में थोड़ी ढील मिलती है. 

 

नुकसान:

  • एसेट खोने का खतरा: समय पर भुगतान न करने पर गिरवी एसेट जब्त हो सकता है. 

  • रिपजेशन: लोन न चुकाने पर पहले दी गई EMIs और एसेट दोनों गवां सकते हैं.

  • ज्यादा डॉक्यूमेंटेशन: डॉक्यूमेंटेशन प्रोसेस लंबा और जटिल हो सकता है.

  • फुल ओनरशिप जरूरी: गिरवी एसेट पर पूरी तरह से आपका मालिकाना हक होना चाहिए.

  • ज्यादा लागत: लंबे टेन्योर वाले लोन में ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ सकता है.

  • एसेट की सही वैल्यू जरूरी: अगर एसेट की वैल्यू लोन अमाउंट से कम हो, तो दिक्कतें आ सकती हैं.

  • कर्ज का बोझ: संपत्ति जब्त होने के बावजूद भी पैसा चुकाना पड़ सकता है.

  • क्रेडिट स्कोर पर असर: रिपेमेंट में चूक होने पर स्कोर खराब हो सकता है. 

निष्कर्ष

सिक्योर्ड लोन, अनसिक्योर्ड लोन के मुकाबले सस्ती ब्याज दर पर मिलते हैं. अगर आपके पास गिरवी रखने के लिए कोई एसेट है, तो ये एक अच्छा ऑप्शन साबित हो सकता है. लोन लेने से पहले अलग-अलग बैंकों की ब्याज दरों और शर्तों की तुलना जरूर करें.

मनीकंट्रोल पर आप 8 अलग-अलग लेंडर्स के 50 लाख रुपए तक के इंस्टेंट पर्सनल लोन ऑफर देख सकते हैं. इन पर ब्याज दरें 10.5% सालाना से शुरू होती हैं और एप्लीकेशन प्रोसेस भी पूरी तरह डिजिटल है.

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