Yearender 2023: बाकी एडुटेक स्टार्टअप्स पर भी दिखा Byju’s के संकट का असर

कोविड महामारी के दौरान यानी 2022 के शुरू तक ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म बायजूज (Byju’s) ने निवेशकों को एडुटेक सेक्टर में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। इस कंपनी में निवेश नहीं कर सकने वाले वेंचर कैपिटल फंड ऐसी दूसरी कंपनियों में भी निवेश करना चाहते थे और जिनके पास महंगे वैल्यूएशन वाली ऐसी कंपनियों के शेयर पहले से थे, वे अपना निवेश बढ़ाना चाह रहे थे, ताकि उन्हें बेहतर रिटर्न मिल सके। हालांकि, इस साल कहानी पलट गई

अपडेटेड Dec 28, 2023 पर 8:39 PM
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बायजूज को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा रहा है, उसका असर अब पूरे भारतीय एडुटेक सेक्टर पर देखने को मिल रहा है।

कोविड महामारी के दौरान यानी 2022 के शुरू तक ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफॉर्म बायजूज (Byju’s) ने निवेशकों को एडुटेक सेक्टर में निवेश करने के लिए प्रेरित किया। इस कंपनी में निवेश नहीं कर सकने वाले वेंचर कैपिटल फंड ऐसी दूसरी कंपनियों में भी निवेश करना चाहते थे और जिनके पास महंगे वैल्यूएशन वाली ऐसी कंपनियों के शेयर पहले से थे, वे अपना निवेश बढ़ाना चाह रहे थे, ताकि उन्हें बेहतर रिटर्न मिल सके। बायजूज इंडियन एडुटेक के लिए पोस्टर बॉय की भूमिका में थी।

हालांकि, कोरोना खत्म होने के बाद कहानी ने यू-टर्न ले लिया। स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर में ऑफलाइन क्लास फिर से शुरू हो गई और माहौल पूरी तरह से बदल गया। इसके बाद एडुटेक कंपनियों के पास अपनी परफॉर्मेंस को बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गई।

दरअसल, कोविड के बाद इन एडुटेक कंपनियों के कोर बिजनेस में सुस्ती आ गई थी। हालांकि, बायजूज ने बदलते समय के हिसाब से कदम बढ़ाने की कोशिश की और देशभर में ट्यूशन सेंटर खोलने के लिए 20 करोड़ डॉलर खोलने का वादा किया, लेकिन कई ऐसी चीजें हुईं, जिसका अंदाजा कंपनी को भी नहीं था। अगर 2022 कंपनी के लिए मुश्किल भरा साल था, तो 2023 कंपनी के लिए उससे भी काफी बुरा साबित हुआ।


कैसे बदले हालात

बायजूज को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा रहा है, उसका असर अब पूरे भारतीय एडुटेक सेक्टर पर देखने को मिल रहा है। इस वजह से भारतीय एडुटेक सेक्टर को लेकर निवेशकों की आशंकाएं बढ़ गई हैं। फंडिंग की मौजूदा स्थिति में एडुटेक कंपनियां अब निवेशकों को लुभाने के लिए तमाम कोशिशें कर रही हैं, कुछ जेनेरेटिव AI को लेकर अपने जुड़ाव का प्रचार-प्रसार कर रही हैं, जबकि कुछ बेहतर प्रॉफिट की बात कह रही हैं। बहरहाल, निवेशकों का मानना है कि इस सेक्टर में कुछ नई स्टार्टअप्स की एंट्री जरूरी है, ताकि इसे संजीवनी मिल सके।

निवेश में भारी गिरावट

मनीकंट्रोल ने अगस्त में खबर दी थी कि बायजूज में मची उथल-पुथल की वजह से देशभर के एडुटेक इनवेस्टर्स में चिंता थी। लिहाजा, एडुटेक आंत्रप्रेन्योर्स के लिए फंड जुटाना मुश्किल हो रहा था। जनरल अटलांटिक (General Atlantic) जैसी कुछ प्राइवेट इक्विटी फर्मों ने भी खुद को इंडियन एडुटेक फर्मों से अलग कर लिया था। ट्रैक्सन (Tracxn) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2023 में एडुटेक कंपनियों में निवेश घटकर 71.2 करोड़ डॉलर हो गया, जो 2021 में 5.33 अरब डॉलर था। पिछले साल यह आंकड़ा 2.9 अरब डॉलर था।

छंटनी और रिकवरी

कॉस्ट में कटौती करने के लिए एडुटेक सेक्टर की कई यूनिकॉर्न और छोटी स्टार्टअप्स ने बड़े पैमाने पर छंटनी की है। स्टार्टअप इकोसिस्टम में इस साल कुल जितनी छंटनी हुई है, उसमें आधी से ज्यादा हिस्सेदारी एडुटेक सेक्टर की है। इसमें बायजूज और अनअकैडमी जैसी यूनिकॉर्न की अहम हिस्सेदारी है।

2024 में क्या हो सकता है?

कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि एडुटेक सेक्टर में जेनरेटिव AI की जबरदस्त संभावना है और भारत में आने वाले वर्षों में इसका काफी बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। एक एक्सपर्ट ने बताया, 'जनरेटिव AI क्रांति ने अमेरिका में नई ए़डुटेक स्टार्टअप्स की बढ़ा रही है। भारत में कुछ मौजूदा स्टार्टअप अपने सिस्टम को AI के साथ इंटिग्रेट करने में जुटी हैं। हालांकि, भारत में कुछ नई स्टार्टअप ही ऐसी हैं, जो इस नई टेक्नोलॉजी के आधार पर तैयार हो रही हैं।' बहरहाल, Eruditus के फाउंडर और CEO अश्विन दमेरा का मानना है कि अगले साल एडुटेक सेक्टर की ग्रोथ पटरी पर लौट जाएगी।

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