भारत के डिजिटल हेल्थकेयर सेक्टर के पास 9 महीने से भी कम का कैश बचा है। टाटा कैपिटल (Tata Capital) की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। डिजिटल हेल्थकेयर सेक्टर में ऑनलाइन फार्मेसी और डिजिटल फिटनेस ऐप प्रमुख रूप से शामिल हैं।
भारत के डिजिटल हेल्थकेयर सेक्टर के पास 9 महीने से भी कम का कैश बचा है। टाटा कैपिटल (Tata Capital) की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। डिजिटल हेल्थकेयर सेक्टर में ऑनलाइन फार्मेसी और डिजिटल फिटनेस ऐप प्रमुख रूप से शामिल हैं।
डिजिटल हेल्थकेयर सेक्टर से जुड़ी 120 कंपनियों के विश्लेषण के मुताबिक, प्राइवेट कैपिटल की फंडिंग की कमी की वजह से ये कंपनियां बड़े पैमाने पर कैश की कमी का सामना कर रही हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन कंपनियों की वैल्यूएशन तकरीबन 6.5 अरब डॉलर है।
हालांकि, टाटा कैपिटल की रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि इन कंपनियों के पास कुल कितना कैश बचा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ कंपनियां प्रॉफिट हासिल करने की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं, लेकिन उनके पास बड़ी चुनौतियां हैं। बहरहाल, इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि फंडिंग की कमी की वजह से आने वाले महीनों में इन कंपनियों की ग्रोथ पर कितना असर पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेगमेंट की कंपनियां ग्रोथ में सुस्ती की चिंता का सामना कर रही हैं और प्रॉफिट को लेकर भी आशंकाएं बनी हुई हैं।
पिछले 5 साल में ई-फार्मेसी सेगमेंट को 2 अरब डॉलर की फंडिंग मिली। हालांकि, फार्मईजी (Pharmeasy) जैसी इस सेगमेंट की कंपनी के वैल्यूएशन में काफी करेक्शन हुआ था। इस कंपनी का IPO असफल रहने के बाद इसके वैल्यूएशन में 90 पर्सेंट तक की गिरावट देखने को मिली। इसके उलट टाटा 1एमजी (Tata 1MG) और नेटमेड्स (Netmeds) जैसे कॉरपोरेट के समर्थन वाले प्लेटफॉर्म में नुकसान के बावजूद ग्रोथ देखने को मिल रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 23 में 1MG की रेवेन्यू ग्रोथ तकरीबन 160 पर्सेंट रही, जबकि नेटमेड्स के रेवेन्यू में 75 पर्सेंट की बढ़ोतरी देखने को मिली। यह सेक्टर अब ऑफलाइन सेगमेंट में हाथ आजमाने को तैयार है और अगले 12 महीनों में नेटमेड्स की योजना 2,000 ऑफलाइन फार्मेसी स्टोर खोलने की है।
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