Peak XV Partners के 3 एग्जिक्यूटिव्स ने अचानक क्यों कंपनी छोड़ने का किया फैसला, क्या ग्रो में निवेश पर 75 गुना रिटर्न है असली वजह?

Peak XV Partners देश के सबसे एक्टिव स्टार्टअप इनवेस्टर्स में से एक है। आशीष अग्रवाल, इशान मित्तल और तेजस्वी शर्मा अब अपना खुद का फंड शुरू करेंगे। सूत्रों ने बताया कि तीनों एग्जिक्यूटिव्स का कंपनी छोड़ने का फैसला बीते 3-4 दिनों के अंदर हुआ

अपडेटेड Feb 05, 2026 पर 4:28 PM
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पीक एक्सवी पार्टनर्स ने ग्रो में अपने निवेश पर 75 गुना यानी 17,300 करोड़ रुपये का रिटर्न कमाया।

पीक एक्सवी पार्टनर्स में करीब एक हफ्ते पहले तक सबकुछ ठीक चल रहा था। फिर अचानक ऐसा क्या हो गया कि इस कैपिटल वेंचर फर्म के तीन एग्जिक्यूटिव्स ने अचानक कंपनी छोड़ने का फैसला कर लिया? आशीष अग्रवाल, इशान मित्तल और तेजस्वी शर्मा अब अपना खुद का फंड शुरू करेंगे। तीनों पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर्स के कंपनी छोड़ने के फैसले ने वेंचर कैपिटल और स्टार्टअप की दुनिया को हिला दिया है।

तीनों एग्जिक्यूटिव्स पीक एक्सवी पार्टनर्स के स्टार परफॉर्मर्स थे

Peak XV Partners देश के सबसे एक्टिव स्टार्टअप इनवेस्टर्स में से एक है। तीनों एक्जिक्यूटिव्स के कंपनी छोड़ने की खबर सबसे पहले मनीकंट्रोल ने 3 फरवरी को दी थी। ये तीनो पीक एक्सवी पार्टनर्स के स्टार परफॉर्मर थे। ग्रो (Groww) में 230 करोड़ रुपये के निवेश का दांव आशीष अग्रवाल ने खेला था, जो काफी ज्यादा सफल रहा। इस निवेश पर पीक एक्सवी पार्टनर्स ने 75 गुना यानी 17,300 करोड़ रुपये का रिटर्न कमाया। ग्रो पिछले साल स्टॉक मार्केट्स में लिस्ट हुई थी। क्लाइंट्स की संख्या के लिहाज से यह देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म है।


बीते 3-4 दिनों के घटनाक्रम के बाद इस्तीफे का फैसला 

इशान मित्तल ने रेजरपे पर दांव लगाया था, जो काफी सफल रहा। 63,000 करोड़ रुपये की यह फिनटेक खुद को लिस्ट करने की तैयारी कर रही है। सूत्रों ने बताया कि तीनों एग्जिक्यूटिव्स का कंपनी छोड़ने का फैसला बीते 3-4 दिनों के अंदर हुआ। इसमें ग्रो में निवेश के भारी रिटर्न की भूमिका थी। मतभेद इस बात को लेकर था कि ग्रो के निवेश पर प्रॉफिट और कैरीड इंट्रेस्ट का स्ट्रक्चर नए वेंचर फंड में किस तरह से होना चाहिए।

सबसे पहले पूर्व एमडी ने आशीष ने कंपनी छोड़ने का किया फैसला

कैरीड इंटरेस्ट का मतलब उस प्रॉफिट से है, जो वेंचर कैपिटलिस्ट्स अपने इनवेस्टमेंट पर कमाते हैं। यह करोड़ों में होता है। इसे कैरी भी कहा जाता है। इस मामले की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति ने बताया, "एक हफ्ते पहले तक पार्टनर्स में सबकुछ ठीक चल रहा था। करीब 5-6 दिन पहले तनाव बढ़ना शुरू हो गया। इसके बाद आशीष ने अचानक कंपनी छोड़ने का फैसला कर लिया। बाद में दो और एग्जिक्यूटिव्स ने भी कंपनी छोड़ने का ऐलान किया।"

वेंचर फर्म के निवेश पर मिले रिटर्न का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं

इस मामले की जानकारी रखने वाले एक दूसरे व्यक्ति ने बताया कि ग्रो में निवेश पर शानदार रिटर्न मिला था। इस बात में कोई संदेह नहीं है, लेकिन वेंचर फर्म के निवेश पर मिले रिटर्न का श्रेय किसी एक व्यक्ति को नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा, "इनवेस्टमेंट पर मिले रिटर्न में कई लोगों की भूमिका होती है। किसने डील का मौका तलाशा, किसने चेक पर साइन किया, किसने फॉलो-इन इनवेस्टमेंट्स के बारे में फैसले लिए और किसने अलग-अलग कामों में पोर्टफोलियो कंपनी की मदद की।"

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एग्जिक्यूटिव्स के कंपनी छोड़ने की वजह इकोनॉमिक डिसएग्रीमेंट

सूत्र ने बताया कि तीनों एग्जिक्यूटिव्स के कंपनी छोड़ने की वजह 'इकोनॉमिक डिसएग्रीमेंट्स' यानी आर्थिक मसलों को लेकर मतभेद थे। इसमें ग्रो में निवेश पर मिले रिटर्न से जुड़े इनसेंटिव्स और पेआउट शामिल थे। इस बात को लेकर भी मतभेद था कि नए फंड में कैरीड इंटरेस्ट की हिस्सेदारी कितनी होगी।

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