एडटेक फर्म अनएकेडमी और अपग्रेड के बीच संभावित अधिग्रहण को लेकर बातचीत टूट गई है। इसकी वजह वैल्यूएशन को लेकर मतभेद बताया जा रहा है। मामले से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी। दोनों कंपनियों के बीच पिछले कई महीनों से बातचीत चल रही थी। मनीकंट्रोल ने सबसे पहले यह बताया था कि अनएकेडमी के अधिग्रहण के लिए अपग्रेड बातचीत कर रही है।
UpGrad की शुरुआत रॉनी स्क्रूवाला ने की थी
UpGrad की शुरुआत रॉनी स्क्रूवाला ने की थी। वह 30-40 करोड़ डॉलर की वैल्यूएशन पर अनएकेडमी का अधिग्रहण करना चाहती थी। यह अनएकेडमी की 3.4 अरब डॉलर की पीक वैल्यूएशन के मुकाबले काफी कम थी। हालांकि, अभी वैल्यूएशन को लेकर तस्वीर साफ नहीं हुई है, लेकिन मनीकंट्रोल को पता चला है कि प्रस्तावित डील के तहत अनएकेडमी के इनवेस्टर्स को अपग्रेड में माइनरिटी हिस्सेदारी मिलने की उम्मीद थी। अपग्रेड अपनी वैल्यू करीब 2 अरब डॉलर लगा रही थी। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
दोनों पक्षों के डील को लेकर नहीं बन पाई सहमति
बताया जाता है कि दोनों पक्ष किसी स्वीकार्य एग्रीमेंट पर पहुंचने में नाकाम रहे। मतभेद की वजह वैल्यूएशन से जुड़ी उम्मीदें और डील स्ट्रक्चर बताई जा रही है। बातचीत टूटने की पुष्टि करते हुए स्क्रूवाला ने मनीकंट्रोल को बताया, "हां, हम आगे बातचीत करने नहीं जा रहे हैं, जिसकी बड़ी वजह वैल्यूएशन को लेकर मतभेद है। हम नंबर्स को लेकर कुछ नहीं बता सकते, लेकिन यह कहना ठीक होगा कि वैल्यूएशंस को लेकर हमारे बीच सहमति नहीं बन पाई।"
अनएकेडमी के पास 1,100 करोड़ रुपये का कैश
गौरव मुंजाल ने मनीकंट्रोल की तरफ से पूछे गए सवालों के जवाब नहीं दिए। अभी अनएकेडमी की बैलेंसशीट में करीब 1,100 करोड़ रुपये का कैश है। सूत्रों ने बताया कि कंपनी आने वाले दिनों में अपने अगले कदम के बारे में फैसला ले सकती है। अनएकेडमी की लीडरशिप में बदलाव के बाद यह बातचीत शुरू हुई थी। इस साल की शुरुआत में को-फाउंडर्स गौरव मुंजाल और रोमन सैनी ने कंपनी में ऑपरेशनल रोल से खुद को अलग कर लिया था।
अनएकेडमी ने कॉस्ट कंट्रोल पर बढ़ाया है फोकस
बीते दो सालों में अनएकेडमी ने अपने एक्सपैंशन प्लान पर ब्रेक लगाया है। पहली कंपनी का प्लान कई कैटेगरीज में विस्तार करने का था। कंपनी ने अपने मुख्य सर्विसेज पर फोकस बढ़ाने के साथ अपनी कॉस्ट को कंट्रोल करने की कोशिश की है। 2022 के बाद से कंपनी ने कई बार एंप्लॉयीज की छंटनी की है। इसकी वजह कोविड के बाद के हालात के हिसाब से ऑपरेटिंग स्ट्रक्चर में बदलाव था।