वक्त बुरा चल रहा है तो Infosys और Tata से लें सबक, Zerodha के Nithin Kamath ने क्यों कहा ऐसा

ऐसी चिंताएं हैं कि जब स्टार्टअप्स के बिजनेस मॉडल डिस्काउंट के दम पर चल रहे हैं और रेवेन्यू का आउटलुक कमजोर है तो ऐसे में भारत में वैल्यूएशंस ज्यादा क्यों है

अपडेटेड May 20, 2022 पर 1:21 PM
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नितिन कामत, फाउंडर और सीईओ, जिरोधा

Zerodha founder Nithin Kamath : मार्केट साइज और अवसर का गलत आकलन, फिर गलत उम्मीदें लगाना और वैल्यूएशंस के पीछे भागना ही संभवतः स्टार्टअप्स के फेल होने की सबसे बड़ी वजह हैं। जिरोधा के फाउंडर और चीफ एग्जीक्यूटिव नितिन कामत ने यह बात कही है।

ट्वीट्स की एक सीरीज के जरिए कामत ने कहा कि वैल्यूएशन की तुलना में स्थायित्व ज्यादा महत्वपूर्ण है और हर बिजनेस की वैल्यू 1 करोड़ डॉलर, 10 करोड़ डॉलर या 1 अरब डॉलर नहीं हो सकती।

वैल्यूएशंस ने बढ़ाई चिंता


ऐसी चिंताएं हैं कि जब स्टार्टअप्स के बिजनेस मॉडल डिस्काउंट के दम पर चल रहे हैं और रेवेन्यू का आउटलुक कमजोर है तो ऐसे में भारत में वैल्यूएशंस पहले से काफी ज्यादा हैं।

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स्टार्टअप सेक्टर को इनवेस्टर्स की तरफ से प्रॉफिट में सुधार और अपने मुख्य बिजनेस पर ध्यान केंद्रित करने का दबाव बढ़ रहा है। साथ ही अगली तिमाहियों में छंटनी करने के लिए कहा जा रहा है।

ऐसे काम हों, जिनसे लचीले बिजनेस खड़े करने में मदद मिले

जिरोधा के कामत ने ट्वीट के जरिये कहा, “वह काम करने की कोशिश होनी चाहिए, जिससे आंत्रप्रेन्योर घर पर लचीले बिजनेस खड़े करने में सक्षम हो सकें। जिससे वे वेल्थ क्रिएट कर सकें, कर्मचारियों का साझा कर सकें और वापस इकोनॉमी को लौटा सकें। जैसे इन्फोसिस से लेकर टाटा ने टेक स्टार्टअप्स तक, आगे लाखों एमएसएमई तक पहुंचाया।”

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हर बिजनेस में स्टार्टअप कहलाने की सनक

उन्होंने कहा, “यह सनक ही है कि आज शुरू हो रहा हर बिजनेस एक स्टार्टअप कहलाना चाहता है और ऊंचे मार्केट साइज और वैल्यूएशंस की बात हो रही है, लेकिन स्थायित्व की बात कोई नहीं करना चाहता। मुझे उम्मीद है कि इस वैश्विक परिदृश्य में यह सोच ठीक हो गई होगी। हमें अच्छे प्रदर्शन के लिए भारत में लचीले बिजनेसेस की जरूरत है।”

वेंचर इंटेलिजेंस के डाटा से पता चलता है कि भारतीय स्टार्टअप्स ने मार्च और अप्रैल में 5.8 अरब डॉलर जुटाए हैं, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15 फीसदी कम है।

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