सॉफ्टवेयर के लिए संस्कृत सबसे बेहतर भाषा, Zoho के सीईओ का दावा, कंपनी की ये है पूरी योजना

स्वदेशी सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो (Zoho) ने हाल ही में 100 करोड़ डॉलर के सालाना रेवेन्यू का माइलस्टोन छुआ था और अब यह एक नए धमाके की तैयारी में है

अपडेटेड Nov 11, 2022 पर 1:27 PM
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वेंबू के मुताबिक संस्कृत को लेकर उन्होंने कोई नई बात नहीं की है बल्कि यह पहले से ही लोगों को पता है।

स्वदेशी सॉफ्टवेयर-ऐज-अ-सर्विस (SAAS) कंपनी जोहो (Zoho) ने हाल ही में 100 करोड़ डॉलर के सालाना रेवेन्यू का माइलस्टोन छुआ था और अब यह एक नए धमाके की तैयारी में है। जोहो संस्कृत पर आधारित मशीन ट्रांसलेशन सॉफ्टवेयर तैयार कर रही है। मशीन ट्रांसलेशन का मतलब ऐसा मैकेनिज्म है जिसके जरिए किसी टेक्स्ट या स्पीच को एक भाषा से दूसरे भाषा में बदला जाता है।

जोहो के को-फाउंडर और सीईओ श्रीधर वेंबू इसे लेकर तमिलनाडु के एक गांव Tenkasi में छोटी सी इंजीनियरिंग टीम के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वेंबू 2019 के मध्य से ही टेंकसी में काम कर रहे हैं और वह गांवों में शिक्षा और तकनीकी रोजगार के अवसरों की महत्ता को लेकर मुखर रहे हैं।

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संस्कृत ही क्यों चुना Zoho ने

श्रीधर वेंबू ने इस हफ्ते की शुरुआत में कंपनी के सालाना टेक्नोलॉजी कांफ्रेंस में संस्कृत की खासियतों को लेकर चर्चा की थी। वेंबू का कहना था कि जब आप एक भाषा से दूसरे भाषा में अनुवाद करते हैं तो सबसे पहले आपको एक कॉमन फॉर्मेट में जाना होता है। यह सबसे अहम मसला है कि कितनी अधिक शुद्धता से एक भाषा से दूसरे भाषा में अनुवाद किया जाए। संस्कृत की खासियत ये है कि यह एकदम सटीक और शुद्ध है।

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वेंबू के मुताबिक संस्कृत को लेकर उन्होंने कोई नई बात नहीं की है बल्कि यह पहले से ही लोगों को पता है। हालांकि अब तक इसका सॉफ्टवेयर में इस्तेमाल नहीं किया गया। अब जोहो इस तकनीक का इस्तेमाल कर प्रोडक्ट्स लॉन्च करने जा रही है। वेंबू के मुताबिक टेक इंडस्ट्री में एक भरोसेमेंद विचार को लोगों ने लंबे समय से बिसरा दिया था लेकिन अब इसका समय आ गया है।

Zoho के बारे में डिटेल्स

सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट कंपनी जोहो चेन्नई की है और इसका कारोबार 150 से अधिक देशों में फैला है। पिछले 25 वर्षों में इसके 8 करोड़ से अधिक यूजर्स बने हैं। जोहो में अभी 11 हजार लोग काम करते हैं और अब अगले एक साल में कंपनी ने ऐसे समय में 1 हजार से अधिक लोगों के हायरिंग की योजना बनाई है जब बायजूज, उड़ान, अनएकेडमी जैसी कई कंपनियों ने इस साल छंटनी की है। आर्थिक सुस्ती के डर से वैश्विक कंपनियों स्ट्राइप, फेसबुक और लिफ्ट ने भी छंटनी की है।

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जोहो के सीईओ के मुताबिक रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के दम पर कंपनी आगे बढ़ रही है और बहुत सी कंपनियां जोहो के एप्लीकेशंस पर शिफ्ट हो रही हैं। R&D पर कंपनी का खर्च मार्केटिंग से भी तीन गुना ज्यादा है और अब कंपनी अगले दशक में ब्लॉकचेन और एआई जैसे तकनीकी में निवेश दोगुना करने पर विचार कर रही है। पिछले पांच साल में जोहो का घरेलू कारोबार 65 फीसदी की सीएजीआर (कंपाउंडर एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ा है और भारत कंपनी के तीन सबसे बड़े बाजारों में शुमार है।

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