Silicon Valley Bank मामले में चौंकाने वाला खुलासा, बैंक के सीईओ ने क्राइसिस से ठीक पहले 36 लाख डॉलर के शेयर बेचे थे

अमेरिकी बैंक SVB के धराशाई होने के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर बैंक के सीईओ ने बैंक की खराब हालत की वजह से पेरेंट कंपनी के 36 लाख डॉलर के शेयर बेचे थे तो यह बहुत गंभीर मामला है

अपडेटेड Mar 11, 2023 पर 11:18 PM
Story continues below Advertisement
शुक्रवार को सिलिकॉन वैली बैंक (SVB) धराशाई हो गया। पेरेंट कंपनी के शेयरहोल्डर्स को लेटर भेजने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। इस लेटर में यह बताया गया था कि कंपनी भारी नुकसान के बाद 2 अरब डॉलर से ज्यादा पूंजी जुटाने की कोशिश करेगी।

सिलिकॉन वैली बैंक (Silicon Valley Bank) मामले में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। बताया जा रहा है कि SVB के चीफ एग्जिक्यूटिव अफसर (CEO) ग्रेग बेकर (Greg Becker) ने बैंक को हुए भारी घाटे के ऐलान से ठीक पहले 36 लाख डॉलर मूल्य के शेयर बेचे थे। ये शेयर SVB की पेरेंट कंपनी SVB Financial Group के थे। इन्हें बैंक के घाटे के ऐलान के दो हफ्ते पहले बेचा गया था। इसे एक ट्रेडिंग प्लान के तहत बेचा गया था। घाटे के ऐलान के बाद कंपनी के शेयरों में बहुत बड़ी गिरावट आई। बताया जाता है कि बेकर ने 27 फरवरी को 12,451 शेयरों की बिक्री जो एक साल से ज्यादा समय में उनकी पहली बिकवाली थी। रगुलेटरी फाइलिंग से यह जानकारी मिली है। उन्होंने ट्रेडिंग प्लान फाइल किया था, जिसके तहत उन्हें 26 जनवरी को शेयरों को बेचने की इजाजत मिली थी।

शेयरों में बड़ी गिरावट

शुक्रवार को सिलिकॉन वैली बैंक (SVB) धराशाई हो गया। पेरेंट कंपनी के शेयरहोल्डर्स को लेटर भेजने के बाद स्थिति और बिगड़ गई। इस लेटर में यह बताया गया था कि कंपनी भारी नुकसान के बाद 2 अरब डॉलर से ज्यादा पूंजी जुटाने की कोशिश करेगी। इस ऐलान के बाद शेयर की कीमतें गिरने लगीं। बेकर ने ग्राहकों को धैर्य बनाए रखने को कहा। लेकिन, इसका कोई असर नहीं पड़ा।


यह भी पढ़ें : Uday Kotak ने SVB क्राइसिस के बारे में दिया बड़ा बयान, कहा-यह तो होना ही था

क्या बेकर को बैंक की हालत की जानकारी थी?

इस मामले में पूछे गए सवालों के जवाब बेकर और SVB ने नहीं दिए। बेकर से यह भी पूछा गया था कि उन्होंने अपने शेयर क्यों बेचे। उनसे यह भी पूछा गया था कि क्या जब उन्होंने ट्रेडिंग प्लान फाइल किया था तब उन्हें बैंक के पूंजी जुटाने के प्लान की जानकारी थी। रेगुलेटरी फाइलिंग से पता चला है कि शेयरों की बिक्री एक रिवोकेबल ट्रस्ट के जरिए की गई, जिस पर बेकर का नियंत्रण है।

क्या है कॉर्पोरेट ट्रेड प्लान?

बेकर ने जिस कॉर्पोरेट ट्रेडिंग प्लान का इस्तेमाल किया, वह किसी तरह से गैरकानूनी नहीं है। सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने 2000 में इस प्लान की शुरुआत की थी। इसे इनसाइडर ट्रेडिंग के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए शुरू किया गया था। इसमें यह तय किया गया था कि अगर कोई एग्जिक्यूटिव शेयर बेचना चाहता है तो उसे तय तारीख के अंदर शेयर बेचने होंगे। इस मामले में शेयरों को बेचने की टाइमिंग और कंपनी के नुकसान के ऐलान की टाइमिंग मैच करती है।

बहुत गंभीर मामला

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बेकर ने जिस 10b5-1 प्लान का इस्तेमाल किया, उसमें कई तरह की कमियां दिखती हैं। इसमें अनिवार्य कूलिंग-ऑफ पीरियड की कमी दिखती है। University of Pennsylvania के Wharton School के प्रोफेसर डैन टेलर ने कहा, "हो सकता है कि बेकर ने 26 जनवरी को जब प्लान की मंजूरी हासिल की तब उन्हें कैपिटल जुटाने के प्लान की जानकारी नहीं हो। अगर शेयर बेचने के प्लान के लिए मंजूरी लेते वक्त उन्हें पूंजी जुटाने को लेकर चल रही बातचीत की जानकारी थी तो यह मामला बहुत गंभीर है।"

नए नियम अप्रैल से लागू होंगे

SEC ने दिसंबर में नए नियमों को मंजूरी दी थी। इसमें कहा गया था कि ज्यादातर एग्जिक्यूटिव ट्रेडिंग प्लान में कम से कम 90 दिन का कूलिंग ऑफ पीरियड होगा। इसका मतलब है कि प्लान के बाद वे नए शिड्यूल के लिए तीन महीने के लिए ट्रेड नहीं कर सकते। यह नियम 1 अप्रैल से लागू होने वाला है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।