यूरोपीय विमान कंपनी एयरबस (Airbus) ने हरियाणा के गुरुग्राम में पायलट ट्रेनिंग सेंटर खोलने (Pilot training centre in Gurugram) के लिए टाटा ग्रुप के स्वामित्व वाली एयर इंडिया (Air India) के साथ साझेदारी की है। कंपनी ने गुरुवार को कहा कि इस साझेदारी के तहत दोनों कंपनियां 50-50 के अनुपात में एक ज्वाइंट वेंचर गठित करेंगी। इसके साथ ही एयरबस ने हैदराबाद स्थित अपनी यूनिट में एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियरिंग ट्रेनिंग कोर्स शुरू करने के लिए जीएमआर एयरो टेक्निक (GMR Aero Technic) के साथ सहयोग की भी घोषणा की।
एयरबस ने कहा कि 3,300 वर्ग मीटर में फैले टाटा एयरबस ट्रेनिंग सेंटर में 10 FFS (full flight simulators), फ्लाइट ट्रेनिंग क्लासरूम और ब्रीफिंग एवं डीब्रीफिंग रूम भी मौजूद होंगे। इस सेंटर के चार A320 FFS की शुरुआती सिम्युलेटर के साथ अगले साल की शुरुआत से चालू होने की उम्मीद है।
इसके जरिए 10 वर्षों में लगभग 5,000 नए पायलटों को A320 और A350 फ्लाइट का ट्रेनिंग दिया जाएगा। वहीं, जीएमआर एयरो टेक्निक के साथ साझेदारी के तहत एयरबस अपरेंटिस हैंडबुक, एग्जाम डेटाबेस, एयरबस अनुकूलित ट्रेनिंग मॉड्यूल तक ऑनलाइन पहुंच जैसी ट्रेनिंग मैटेरियल मुहैया कराएगी। इसके अलावा यह जीएमआर उन्हें ट्रेंड भी करेगा और ट्रेनिंग सेंटर का निरंतर मूल्यांकन भी प्रदान करेगा।
भारत को अगले 20 साल में 41 हजार पायलट की जरूरत
भारत को अगले 20 साल में 2,840 नए विमानों और 41,000 पायलटों की जरूरत होगी। एयरबस भारत और दक्षिण एशिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रेमी मेलार्ड यह अनुमान जताते हुए कहा कि साथ ही देश में 47,000 टेक्नीकल कर्मचारियों की आवश्यकता भी होगी। उन्होंने कहा कि एयरबस इस दशक के अंत तक भारत से अपनी सोर्सिंग को मौजूदा 75 करोड़ अमेरिकी डॉलर से दोगुना कर 1.5 अरब डॉलर कर देगी।
उन्होंने कहा कि पिछले साल एयरबस को 750 विमानों का ऑर्डर मिला। उसने भारतीय एयरलाइन कंपनियों को 75 विमानों की आपूर्ति की। इनमें 41 इंडिगो को, 19 एयर इंडिया को, 14 विस्तारा को और एक गो फर्स्ट को दिए गए। उन्होंने अनुमान जताया कि अगले 20 साल में भारत 6.2 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। मेलार्ड ने कहा कि अनुमान है कि भारत को अपने बढ़ते विमानन बाजार की जरूरतों को पूरा करने के लिए अगले 20 वर्षों में 2,840 नए विमानों की जरूरत होगी।