टाटा ग्रुप (Tata Group) अगले कुछ सालों में भारत में सेमीकंडक्टर्स (Semiconductors) का उत्पादन शुरू करने वाला है। टाटा संस के चेयरमैन नटराजन चंद्रशेखरन (Natarajan Chandrasekaran) ने गुरुवार 8 दिसंबर को जापान के प्रमुख बिजनेसपेपर निक्केई एशिया को दिए एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी। नमक से लेकर स्टील तक बनाने वाले टाटा ग्रुप के इस कदम से भारत को ग्लोबल लेवल पर चिप की सप्लाई चेन का एक अहम हिस्सा बनने में मदद मिल सकती है, जो अभी तक कोरोना महामारी के चलते आई मुश्किलों से उबर नहीं पाई है। चंद्रशेखरन ने इंटरव्यू में कहा कि कहा कि कंपनी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स जैसे कुछ उभरते क्षेत्रों में नए व्यवसाय शुरू करने की योजना बना रही है।
Tata Electronics बनाएगी सेमीकंडक्टर
टाटा संस के चेयरमैन ने कहा, "हमने टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स बनाया है, जिसके तहत हम सेमीकंडक्ट एसेम्बली टेस्टिंग बिजनेस शुरू करने जा रहा है।" बता दें कि टाटा ने साल 2020 में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग के उद्देश्य से टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की स्थापना की थी।
चंद्रशेखरन ने आगे कहा, "हम विभिन्न एंटिटी से इसे लेकर चर्चा करेंगे।" चंद्रशेखरन के इस बयान से संकेत मिलता है कि टाटा ग्रुप इसके लिए सेमीकंडक्टर बनाने वाली किसी मौजूदा कंपनी के साथ साझेदारी कर सकती है। बता दें कि चंद्रशेखरन ने इससे पहले भी कई मौकों पर सेमीकंडक्ट बिजनेस में टाटा ग्रुप के उतरने की इच्छा जाहिर की है।
उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स के हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के बाजार में 1 ट्रिलियन डॉलर के मौके होने का अनुमान लगाते हुए कहा था कि टाटा ग्रुप इस मौके का फायदा उठाने के लिए पहले ही एक कंपनी खोल चुकी है।
अपस्ट्रीम चिप फैब्रिकेशन प्लेटफॉर्म भी लॉन्च करेगी टाटा ग्रुप
निक्केई एशिया के साथ बात करते हुए चंद्रशेखरन ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि टाटा "एक अपस्ट्रीम चिप फैब्रिकेशन प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की संभावना पर भी विचार करेगा।" सेमीकंडक्टर की मैन्युफैक्चरिंग में भारी निवेश की जरूरत होती है। वहीं अपस्ट्रीम सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस प्लांट में तकनीकी और वित्तीय दोनों तरह से अधिक निवेश की जरूरत होती है।
90 अरब डॉलर का हो सकता है निवेश
टाटा संस के चेयरमैन ने निक्केई एशिया को यह भी बताया कि Tata Groups ने अगले 5 सालों में 90 अरब डॉलर का निवेश (करीब 7.4 लाख करोड़ रुपये) करने की योजना बनाई है।