Third wave: टेलीविजन और फुटवियर जैसे प्रोडक्ट्स के रिटेल विक्रेताओं और वितरकों (Distributions) ने कोरोना के नए वेरिएंट के कारण पैदा हुई अनिश्चितता और इसके कारण लागू हो सकने वाली पाबंदियों की संभावना के बीच, पिछले 15 दिनों के मुकाबले अपनी इन्वेंट्री में सालाना आधार पर करीब एक तिहाई की कटौती कर दी है।
टेलीविजन, स्मार्टफोन, रिफ्रिजरेटर, वाशिंग मशीन जूते बनाने वाली कंपनियों का कहना है कि कोरोना की पिछली दो लहरों को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर रिटेलर और डिस्ट्रीब्यूटर अपनी इन्वेंट्री (inventory) को 30 दिन से घटाकर 15 दिन करना चाहते हैं। ऐसा करने का लक्ष्य कारोबार में गिरावट के दौरान कैश फ्लो पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव से निपटना है।
जानकारों का कहना है कि इससे धीरे-धीरे रिकवरी हासिल कर रहे कारोबार में जनवरी महीने में फिर दबाव दिख सकता है। रिटेलर्स का अनुमान है कि कोरोना का नया वेरिएंट एक बार फिर कंज्यूमर डिमांड पर अपना असर डाल सकता है। जिसको ध्यान में रखते हुए वो सावधानी पूर्वक इन्वेट्री घटा रहे है। आगे स्थितियां क्या होंगी, इसको देखकर अभी कोई तस्वीर साफ नहीं है। जिसके कारण कारोबारी इस तरह के कदम उठा रहे हैं।
डिमापर्टमेंटल स्टोर चेन लाइफस्टाइल इंटरनेशनल (Departmental store chain Lifestyle International) के CEO देवराजन अय्यर (Devarajan Iyer) का कहना है कि नए ऑर्डर देने के लिए कारोबारी वेट एंड वाच की रणनीति अपना रहे हैं। नए ऑर्डर इस बात पर निर्भर करेंगे कि बिक्री और सरकार द्वारा लगाई जाने वाली पाबंदियों के नजरिए से अगले दो हफ्ते कैसे रह सकते हैं।
जिन राज्यों में कोरोना संक्रमित मरीजों की तादाद तेजी से बढ़ रही हैं, वहां राज्य सरकारें कड़ी पाबंदी लगा रही हैं। नाइट कर्फ्यू के अलावा रिटेल दुकानों के ऑड-ईवन (odd-even) खुलने और कारोबार के समय में कटौती के अलावा दिल्ली, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों ने पहले ही वीकेंड कर्फ्यू लगा दिया है। वहीं एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स (LG Electronics), कैरियर मीडिया (Carrier Midea) और गोदरेज (Godrej) अप्लायंस जैसी कपनियों ने भी माना है कि डीलर कम खरीदारी कर रहे हैं, जिससे उनके भी कारोबार पर असर पड़ा है।