आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने सबसे अधिक किसी पेशे में बदलाव डाला है, तो वह सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग है। अब दिग्गज चिप कंपनी एनवीडिया (Nvidia) के CEO जेनसन हुआंग (Jensen Huang) का कहना है कि यह बदलाव और गहरा हो सकता है जैसे कि यह इंजीनियर्स के वैल्यूएशन, हायरिंग के तरीके और वेतन को बदल सकता है। All-In Podcast पर बोलते हुए जेनसन ने कहा कि अभी इंजीनियर्स प्रोडक्टिविटी कोड की लाइन्स या आउटपुट से मापी जाती है लेकिन जल्द ही एआई के इस दौर में प्रोडक्टिविटी मापने का तरीका ये हो सकता है कि इंजीनियर्स एआई कंप्यूट का कितने प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करते हैं। इसे टोकन्स में मापा जाता है।
कोड से कंप्यूट, प्रोडक्टिविटी का नया बेंचमार्क
एनवीडिया के सीईओ का कहना है कि जैसे-जैसे एआई हर दिन के डेवलपमेंट वर्कफ्लो में शामिल होता जा रहा है, एआई सिस्टम कितने कंप्यूट यूनिट यानी टोकंस की खपत कर रही है, इससे परफॉरमेंस मापा जा सकता है। इसका मतलब हुआ कि कंपनियां अब इंजीनियरों को सिर्फ उनके काम के आधार पर नहीं, बल्कि इस पर भी कर सकती हैं कि वे एआई टूल्स का इस्तेमाल करके अपने आउटपुट को कितना बढ़ाते हैं। उन्होंने एक उदाहरण के साथ समझाया कि मान लीजिए अगर कोई सॉफ्टवेयर इंजीनियर या AI रिसर्चर है जिसे कंपनी सालाना $5,00,000 दे रही है लेकिन अगर वह $2,50,000 के टोकन्स का भी इस्तेमाल नहीं करता है तो बड़े चिंता की बात होगी। एनवीडिया के सीईओ के मुताबिक महंगे टैलेंट के साथ शक्तिशाली एआई सिस्टम का अधिक इस्तेमाल होना चाहिए, वरना कंपनियां दोनों का पूरा फायदा नहीं उठा पाएंगी।
क्या हैं एआई टोकन्स और कितने अहम हैं ये
एआई टोकन्स वे बेसिक यूनिट्स हैं जिनका इस्तेमाल एआई सिस्टम टेक्स्ट बनाने, कोड लिखने या डेटा को एनालाइज करने जैसे कामों में करती हैं। हर इनपुट प्रॉम्प्ट और आउटपुट रिस्पॉन्स टोकन्स का इस्तेमाल करता है, जो किसी काम को पूरा करने में लगी कंप्यूटिंग शक्ति को दिखाता है। चूंकि कंपनियां इस कंप्यूट के लिए पेमेंट करती हैं, इसलिए टोकन का इस्तेमाल यह दिखाता है कि एक इंजीनियर एआई का कितना इस्तेमाल कर रहा है। जैसे कि एंथ्रॉपिक (Anthropic) के क्लाउडे (Claude) या गूगल (Google) और ओपनएआई (OpenAI) के सिस्टम जैसे प्रमुख मॉडल की कीमत आमतौर पर प्रति टोकन तय होती है और इस्तेमाल के आधार पर ये प्रति मिलियन यानी दस लाख टोकन्स कुछ डॉलर तक हो सकती है।
एनवीडिया के सीईओ के मुताबिक जैसे आज सैलरी या प्रोजेक्ट रिसोर्सेज दिए जाते हैं, वैसे ही आने वाले समय में इंजीनियर्स को कंपनियां टोकन बजट दे सकती हैं। उनका मानना है कि जिन कंपनियों के पास बड़ा एआई बजट होगा, वे बेहतर टैलेंट को अपने से जोड़ पाएंगी। इसका मतलब यह है कि इंजीनियरों का वैल्यूएशन सिर्फ उनके आउटपुट से नहीं, बल्कि इस बात से भी होगा कि वे एआई टूल्स का कितना आक्रामक और प्रभावी इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मॉडल में उपलब्ध कंप्यूट का कम इस्तेमाल कम क्षमता माना जा सकता है।