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राजा-प्रजा मॉडल में कंपनी के लिए संपत्ति बनाई जाती है, लेकिन ट्रस्टीशिप मॉडल में देश का निर्माण होता है: उदय कोटक

कोटक महिंद्रा बैंक के प्रमोटर और फाउंडर उदय कोटक का कहना है कि कॉरपोरेट इंडिया में दो बिजनेस मॉडल हैं- पहले मॉडल में कंपनी के लिए तमाम तरीके से अकूत संपत्ति बनाई जाती है, जबकि दूसरे मॉडल में राष्ट्र का निर्माण होता है। एक मीडिया हाउस के कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। कोटक का कहना था कि उनके दिल ने हमेशा से ट्रस्टीशिप मॉडल का समर्थन किया है, क्योंकि उनका मानना है कि यह बिजनेस मॉडल सही मायनों में देश और कंपनी का निर्माण करता है

MoneyControl Newsअपडेटेड Oct 05, 2023 पर 8:24 PM
राजा-प्रजा मॉडल में कंपनी के लिए संपत्ति बनाई जाती है, लेकिन ट्रस्टीशिप मॉडल में देश का निर्माण होता है: उदय कोटक
उदय कोटक का कहना था कि उनके दिल ने हमेशा से ट्रस्टीशिप मॉडल का समर्थन किया है।

कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) के प्रमोटर और फाउंडर उदय कोटक (Uday Kotak) का कहना है कि कॉरपोरेट इंडिया में दो बिजनेस मॉडल हैं- पहले मॉडल में कंपनी के लिए तमाम तरीके से अकूत संपत्ति बनाई जाती है, जबकि दूसरे मॉडल में राष्ट्र का निर्माण होता है। एक मीडिया हाउस के कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।

कोटक का कहना था कि उन्हें इस बात में पूरा यकीन है कि कॉरपोरेट इंडिया में दो बिजनेस मॉडल हैं। उन्होंने कहा, 'एक मॉडल ऐसा है, जिसे मैं राजा-प्रजा मॉडल कहता हूं।' उनके मुताबिक, 'इस मॉडल में राजा तय करता है कि कंपनी के लिए क्या सही है। वह अपने हिसाब से चीजें करता है। राजा जो करता है, प्रजा को उसे स्वीकार करना पड़ता है।'

उदय कोटक का कहना था, ' राजा के पास काफी ताकत होती है, लिहाजा वह कंपनी के लिए अकूत संपत्ति बना सकता है, लेकिन राजा यह तय करेगा कि प्रजा को कितना मिलेगा...यह राजा-प्रजा मॉडल है।'

उदय कोटक के मुताबिक, दूसरा मॉडल ट्रस्टीशिप का मॉडल है। उन्होंने कहा, 'इस मॉडल में आप (प्रमोटर) कहते हैं कि आप सभी स्टेकहोल्डर्स के लिए ट्रस्टी हैं और उनके लिए बिना भेदभाव वाला बिजनेस मॉडल तैयार करते हैं।' हालांकि, कोटक का कहना था कि बिजनेस से जुड़ अवसरों को हासिल करने के मामले में ट्रस्टीशिप मॉडल उतना असरदार नहीं है, जितना राजा-प्रजा मॉडल। लेकिन यह सभी पक्षों के लिए ज्यादा बेहतर है।

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