अमेरिकी अर्थव्यवस्था चौथी तिमाही में सिर्फ 0.5% की सालाना दर से बढ़ी। यह पहले के 0.7% के अनुमान से कम है। वाणिज्य विभाग के मुताबिक, पिछले साल हुए 43 दिन के सरकारी शटडाउन का इसका बड़ा असर रहा।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था चौथी तिमाही में सिर्फ 0.5% की सालाना दर से बढ़ी। यह पहले के 0.7% के अनुमान से कम है। वाणिज्य विभाग के मुताबिक, पिछले साल हुए 43 दिन के सरकारी शटडाउन का इसका बड़ा असर रहा।
यह सुस्ती ऐसे समय आई है, जब इससे पहले अर्थव्यवस्था काफी मजबूत दिख रही थी। तीसरी तिमाही में 4.4% और दूसरी तिमाही में 3.8% की ग्रोथ दर्ज की गई थी। लेकिन सरकारी खर्च और निवेश में 16.6% की गिरावट आई। इससे चौथी तिमाही की GDP से 1.16 प्रतिशत अंक कम हो गए।
कंज्यूमर खर्च भी हुआ धीमा
अर्थव्यवस्था को चलाने वाला सबसे बड़ा फैक्टर कंज्यूमर खर्च भी अब धीमा पड़ता दिख रहा है। यह 1.9% बढ़ा, जो पहले के अनुमान से कम है और दूसरी तिमाही के 3.5% से काफी नीचे है। ऑटोमोबाइल और कपड़ों जैसे सामानों पर खर्च सिर्फ 0.3% बढ़ा, जो पिछले क्वार्टर के 3% के मुकाबले काफी कम है।
पूरे साल की ग्रोथ में भी नरमी
पूरे 2025 की बात करें तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था 2.1% बढ़ी। यह 2024 के 2.8% और 2023 के 2.9% से कम है। हाउसिंग को छोड़कर बिजनेस निवेश 2.4% बढ़ा। इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में बढ़ते निवेश से जोड़ा जा रहा है, लेकिन यह भी तीसरी तिमाही के 3.2% से कम है।
ताकत वाले इंडिकेटर कमजोर
GDP का एक अहम हिस्सा अक्टूबर से दिसंबर के बीच सिर्फ 1.8% बढ़ा, जो तीसरी तिमाही के 2.9% से कम है। यह अर्थव्यवस्था की असली मजबूती को दिखाता है। इसमें कंज्यूमर खर्च और प्राइवेट निवेश शामिल होते हैं, लेकिन एक्सपोर्ट, इन्वेंट्री और सरकारी खर्च जैसे उतार-चढ़ाव वाले हिस्से शामिल नहीं होते।
आगे का रास्ता अनिश्चित
आगे की तस्वीर भी साफ नहीं है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव ने ऊर्जा की कीमतें बढ़ा दी हैं और वैश्विक व्यापार पर असर डाला है, जिससे आर्थिक माहौल अनिश्चित बना हुआ है।
जॉब मार्केट का मिला-जुला हाल
अमेरिका का जॉब मार्केट पिछले साल कमजोर रहा और 2002 के बाद सबसे धीमी भर्ती दर्ज की गई। हालांकि 2026 में अब तक तस्वीर मिली-जुली है। जनवरी में 1.6 लाख नौकरियां जुड़ीं, फरवरी में 1.33 लाख कम हुईं और मार्च में 1.78 लाख नई नौकरियां बनीं।
यह रिपोर्ट चौथी तिमाही GDP का तीसरा और अंतिम अनुमान है। जनवरी-मार्च तिमाही के शुरुआती आंकड़े 30 अप्रैल को जारी किए जाएंगे।
महंगाई का दबाव बरकरार
फरवरी में अमेरिका में महंगाई काबू में आने के बजाय बनी रही, जहां PCE इंडेक्स 2.8% और कोर PCE 3% रहा। यह अनुमान के मुताबिक है लेकिन कीमतों के दबाव के कम न होने का संकेत देता है। महीने के हिसाब से भी महंगाई 0.4% बढ़ी, जो जनवरी से ज्यादा है।
इस बीच पर्सनल सेविंग रेट घटकर 4% रह गया, जिससे साफ है कि लोग बचत कम कर रहे हैं। ऊपर से ईरान से जुड़े तनाव के चलते तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे आगे महंगाई और बढ़ने का खतरा है। गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक कच्चे तेल में 10% उछाल महंगाई को और ऊपर ले जा सकता है।
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