Primary Markets: IPO बाजार में लौटेगी रौनक, अमेरिका-ईरान सीजफायर से निवेशकों को बड़े मौके मिलने के आसार

Primary Markets: पिछले कुछ हफ्तों से युद्ध के डर और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की वजह से कई कंपनियों ने अपने आईपीओ टाल दिए थे। प्राइम डेटाबेस के अनुसार, 20 मार्च तक 200 से ज्यादा कंपनियों ने सेबी के पास DRHP जमा कराए थे। इनमें से 138 कंपनियों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 69 कंपनियां क्लीयरेंस का इंतजार कर रही हैं

अपडेटेड Apr 08, 2026 पर 3:08 PM
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फरवरी में आईपीओ के जरिए ₹8,161 करोड़ जुटाए गए थे, जो मार्च में घटकर ₹5,851 करोड़ रह गए

IPO Market: अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के संघर्ष विराम के ऐलान ने न केवल युद्ध की चिंताओं को कम किया है, बल्कि भारतीय शेयर बाजार और प्राइमरी मार्केट में भी नई जान फूंक दी है। बुधवार को सेंसेक्स और निफ्टी में करीब 4% की जोरदार तेजी देखी गई, जो इस बात का संकेत है कि बाजार अब नई शुरुआत के लिए तैयार है।

रुके हुए IPOs को मिलेगी नई दिशा

पिछले कुछ हफ्तों से युद्ध के डर और बाजार में भारी उतार-चढ़ाव की वजह से कई कंपनियों ने अपने आईपीओ टाल दिए थे। अब शांति की खबरों के बीच इन कंपनियों के लिए 'राहत की खिड़की' खुल गई है। प्राइम डेटाबेस के अनुसार, 20 मार्च तक 200 से ज्यादा कंपनियों ने सेबी के पास DRHP जमा कराए थे। इनमें से 138 कंपनियों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 69 कंपनियां क्लीयरेंस का इंतजार कर रही हैं।


कब शुरू होगी हलचल?

बाजार विशेषज्ञों और इन्वेस्टमेंट बैंकर्स का मानना है कि अगले 3 से 4 महीनों में उन आईपीओ की लॉन्चिंग देखने को मिल सकती है जो अब तक अटके हुए थे। हालांकि, उन्होंने कुछ सावधानियां भी जताई हैं:

फाइनेंशियल अपडेट: कुछ कंपनियों को अपने वित्तीय आंकड़े अपडेट करने होंगे, जिसमें थोड़ा समय लग सकता है।

फंडामेंटल्स पर जोर: अच्छी बुनियाद वाली और प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंच चुकी कंपनियां जल्दबाजी में अपनी डील पूरी करना चाहेंगी।

मार्च में दिखी थी सुस्ती, अब सुधार की बारी

आंकड़े बताते हैं कि बाजार पर युद्ध का असर काफी गहरा था। फरवरी में आईपीओ के जरिए ₹8,161 करोड़ जुटाए गए थे, जो मार्च में घटकर ₹5,851 करोड़ रह गए।हालांकि, छोटी कंपनियों ने इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भी बाजार का रुख किया, लेकिन बड़ी डील के लिए निवेशक कतरा रहे थे।

14 दिनों की 'विंडो' और ब्लॉक डील्स

विशेषज्ञों का कहना है कि आईपीओ के अलावा, इस 14 दिनों के सीजफायर के दौरान ब्लॉक डील्स भी तेजी देखी जा सकती है। संस्थागत निवेशक इस मौके का फायदा उठाकर बड़े शेयरों में खरीदारी या बिकवाली कर सकते हैं। बड़े आईपीओ के लिए अभी भी थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन छोटे और मंझोले आईपीओ के सफल होने की संभावना काफी ज्यादा है।

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