वेदांता रिसोर्सेज (Vedanta Resources) के चेयरमैन और फाउंडर अनिल अग्रवाल के चिप का सपना अटकता दिख रहा है। उनकी 1900 करोड़ डॉलर का चिप प्लांट लगाने की योजना में एक टेक्नोलॉजी पार्टनर तलाशने और सरकार से वित्तीय सहायता हासिल करने में चुनौतियों के चलते लड़खड़ा रही है। सात महीने पहले अनिल अग्रवाल ने वेदांता रिसोर्स और ताइवान की Hon Hai Precision Industry यानी फॉक्सकॉन (Foxconn) के साथ चिप पार्टनरशिप का ऐलान किया था। हालांकि अभी तक किसी फैब्रिकेशन यूनिट ऑपरेटर या लाइसेंस मैन्युफैक्चरिंग-ग्रेड टेक्नोलॉजी के साथ बात नहीं बन पाई है। सरकार से वित्तीय सहायता हासिल करने के लिए इनमें से किसी एक की जरूरत पड़ती है।
वेदांता की इन दिक्कतों से समझा जा सकता है कि नया सेमीकंडक्टर प्लांट्स सेटअप करना कितना मुश्किल है। इसमें भारी खर्च भी होता है और इसे चलाने के लिए खास एक्सपर्ट्स की भी जरूरत होती है। वहीं वेदांता मेटल और माइनिंग कंपनी है जबकि फॉक्सकॉन आईफोन असेंबल करती है यानी दोनों के पास ही सेमीकंडक्टर यानी चिप को लेकर विशेषज्ञता नहीं है। वहीं वित्तीय दबावों से जूझ रही वेदांता को सरकार से फंड की भी जरूरत है क्योंकि इस प्रोजेक्ट में भारी निवेश की जरूरत है।
कहां तक आगे बढ़ी हैं Vedanta और Foxconn
वेदांता और फॉक्सकॉन के वेंचर ने लाइसेंस चिप फैब्रिकेशन टेक्नोलॉजी के लिए ग्लोबलफाउंड्रीज इंक (GlobalFoundries Inc.) और एसटीमाइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स एनवी (STMicroelectronics NV) के साथ बातचीत किया था। हालांकि इस बातचीत के तहत कोई सौदा नहीं हो पाया। वहीं यह भी नहीं पता चल सका है कि यह बातचीत अभी भी जारी है या नहीं। वहीं ब्लूमबर्ग ने इस मामले में वेदांता से जानकारी मांगी तो इसने ई-मेल के जरिए कहा कि यह प्लांट बनाने को लेकर पूरी कोशिश कर रही है और इसने एक मजबूत टेक्नोलॉजी पार्टनर खोज भी लिया है। हालांकि इसने यह नहीं बताया कि यह टेक पार्टनर कौन है और किसी सौदे पर बात बनी है या नहीं। वहीं फॉक्सकॉन, ग्लोबलफाउंड्रीज, एसटीमाइक्रो और भारतीय टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री ने इस मामले में किसी सवाल पर तत्काल कोई जबाव नहीं दिया है।
पैसों को लेकर कहां फंस रहा पेच
वेदांता और फॉक्सकॉन भारत में चिप प्लांट के लिए एक पार्टनर की तलाश तो कर ही रही है, वहीं इसे फंडिंग को लेकर भी दिक्कत आ रही है। कंपनी ने इस प्लांट को लेकर सरकार के पास 1 हजार करोड़ डॉलर के कैपिटल एक्सपेंडिचर का अनुमान सबमिट किया है। वहीं सरकार का मानना है कि इस अनुमान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है और उसका अनुमान है कि इस प्रोजेक्ट पर 1 हजार करोड़ डॉलर नहीं बल्कि 500 करोड़ डॉलर की लागत आएगी। अगर सभी जरूरतें पूरी होती हैं तो सरकार प्रोजेक्ट की लागत का आधा भुगतान करेगी। वेदांता का कहना है कि खर्चों का अनुमान इसी प्रकार के बाकी प्रोजेक्ट्स की ही तरह है यानी इसे बढ़ा-चढ़ाकर नहीं पेश किया गया है।
कितना अहम है चिप प्लांट देश के लिए
चीन और ताइवान पर चिप के लिए निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका समेत दुनिया के कई देश अपने यहां ही चिप बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में चिप के उत्पादन के लिए 1 हजार करोड़ डॉलर का ड्राइव शुरू किया है। हालांकि भारत में अभी तक इसे लेकर बात आगे नहीं बढ़ पाई है।