Zerodha की कैसे होती है कमाई, अब आगे क्या है प्लान, फाउंडर-सीईओ Nithin Kamath ने किया खुलासा

Zerodha के लिए वित्त वर्ष 2022 बहुत शानदार रही। इसका मुनाफा दो गुना बढ़ गया और रेवेन्यू में 80 का उछाल रहा। हालांकि जीरोधा के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत (Nithin Kamath) के मुताबिक स्टॉकब्रोकिंग उतार-चढ़ाव वाला कारोबार है और इसमें बाजार की तेजी के मुताबिक ही ग्रोथ होती है

अपडेटेड Jan 13, 2023 पर 10:42 PM
Zerodha के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत (Nithin Kamath)।

दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जीरोधा (Zerodha) के लिए वित्त वर्ष 2022 बहुत शानदार रहा। इसका नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर करीब दो गुना उछलकर 2094 करोड़ रुपये और रेवेन्यू 80 फीसदी बढ़कर 4963 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। हालांकि जीरोधा के फाउंडर और सीईओ नितिन कामत (Nithin Kamath) के मुताबिक स्टॉकब्रोकिंग उतार-चढ़ाव वाला कारोबार है और इसमें बाजार की तेजी के मुताबिक ही ग्रोथ होती है। वर्ष 2021 के आखिरी और वर्ष 2022 के शुरुआती महीने में ऐसा समय भी आया जब एक महीने में 3.50 लाख नए कस्टमर जुड़े लेकिन उसके बाद से इसमें गिरावट है।

इसमें रिकवरी की उम्मीद तो है लेकिन कामत का मानना है कि वित्त वर्ष 2024 में भी एक महीने 3.50 लाख नए ग्राहक के लेवल को पाना मुश्किल होगा। मनीकंट्रोल से बातचीत में जीरोधा के मालिक ने कंपनी के आगे की योजनाओं और कंपनी की कमाई के बारे में बातचीत की।

Zerodha की कैसे होती है कमाई

जीरोधा की बैलेंस शीट में इसके डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म कॉइन (Coin) के भी आंकड़े शामिल हैं। हालांकि कॉइन से जीरोधा को सिर्फ इनडायरेक्ट रेवेन्यू हासिल होता है क्योंकि इसमें सालाना 300 रुपये का मेंटेनेंस चार्ज ही कंपनी को मिलता है। वहीं यह चार्ज भी सिर्फ एक्टिव यूजर्स से लिया जाता है। जीरोधा का 70-75 फीसदी रेवेन्यू एक्टिव ट्रेडर्स से आता है जिनसे कंपनी प्रति ट्रेड 20 रुपये लेती है। शेयरों में निवेश पर कंपनी कोई चार्ज नहीं वसूलती है। इसके अलावा कंपनी खाता खुलवाने, मेंटनेंस के लिए जो चार्ज वसूलती है, उसकी रेवेन्यू में करीब 7 फीसदी हिस्सेदारी है।


Coin को लेकर क्या है कंपनी की योजना

जीरोधा के म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म कॉइन करीब 33 हजार करोड़ रुपये का फंड मैनेज करती है यानी कि इसका एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 33 हजार करोड़ रुपये है। हालांकि कंपनी ने इसे अभी मोनेटाइज नहीं किया हुआ है। पिछले साल जुलाई में सेबी ने नियम बना दिया कि स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड्स के लिए अलग-अलग पैसे रखने होंगे जबकि पहले ट्रेडिंग अकाउंट में रखे पैसों से चाहे शेयर खरीदें या म्यूचुअल फंड्स, कोई दिक्कत नहीं। इसे लेकर कामत का कहना है कि कॉइन पर ग्राहकों का अनुभव खराब हुआ है। अब प्रत्यक्ष रूप से या किसी स्टार्टअप के साथ साझेदारी कर एडवायजरी बिजनेस तैयार करना है जिसमें कॉइन की भूमिका फाउंडेशनल ब्लॉक के तौर पर होगी।

एसेट मैनेजमेंट कंपनी के लिए अप्रूवल का इंतजार

बाजार की उतार-चढ़ाव के बीच म्यूचुअल फंड में निवेश मजबूत रहा। ऐसे में कामत की योजना एक एसेट मैनेजमेंट कंपनी तैयार करने की है। इसके लिए अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है। कामत के मुताबिक मंजूरी मिलते ही यह बिजनेस तीन महीने के भीतर लॉन्च हो जाएगा। अभी तक प्रोडक्ट को लेकर कुछ तय नहीं हुआ है लेकिन पैसिव म्यूचुअल फंड्स ऑफर करने की योजना है। बाजार में कई एएमसी पैसिव म्यूचुअल फंड्स ऑफर करती है लेकिन जीरोधा इस मामले में अलग यह करेगी कि यह सिर्फ यही ऑफर करेगी जबकि बाकी एएमसी पैसिव और एक्टिव दोनों म्यूचुअल फंड्स ऑफर करती हैं। एक्टिव फंड्स में कमाई अधिक है।

पैसिव फंड्स में फीस को लेकर क्या है राय

इस समय पैसिव फंड्स में सबसे कम मैनेजमेंट फीस 0.15 फीसदी है। कामत के मुताबिक इसे नीचे लाना मुमकिन नहीं है। कामत ने इसे एक्स्प्लेन किया कि अगर मान लेते हैं कि 1 लाख करोड़ रुपये का AUM हासिल हो जाता है तो इस पर 0.15 फीसदी के हिसाब से सिर्फ 150 करोड़ रुपये का रेवेन्यू बनेगा। हालांकि वहीं दूसरी तरफ ये भी है कि भारत में 150 करोड़ रुपये का एयूएम हासिल करना ही बहुत बड़ा मुश्किल काम है। ऐसे में कामत के मुताबिक बाजार की मौजूदा स्थिति को देखते हुए इस फीस को कम करना बहुत मुश्किल है।

दो से तीन हफ्ते में पेंशन फंड लॉन्च करने की तैयारी

जीरोधा के नेशनल पेंशन स्कीम फंड ऑपरेट करने के लिए ग्रीन सिग्नल मिल चुका है। अब कामत की योजना इसे अगले दो से तीन हफ्ते के भीतर लाइव करने की है। कामत के मुताबिक एनपीएस की सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें लॉक इन पीरियड होता है।

निवेशकों के लिए क्या है सुझाव

पिछले 20 साल से अधिक समय में सेंसेक्स 15.5 फीसदी और निफ्टी 50 करीब 15 फीसदी की सीएजीआर (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) से बढ़ा है। ऐसे में कामत से पूछा गया कि क्या नए निवेशकों को 20 से 30 साल के लिए इंडेक्स फंड में निवेश करना चाहिए? कामत का जवाब निगेटिव रहा। कामत के मुताबिक एक्टिव फंड मैनेजर्स के लिए अब इंडेक्स को पीटना बहुत मुश्किल हो चुका है। हालांकि स्मॉल-कैप और मिड-कैप स्पेस में कुछ फंड मैनेजर्स जरूर बढ़िया रिटर्न दिला सकते हैं यानी कि मिड-कैप इंडेक्स से ज्यादा रिटर्न दिला सकते हैं। ऐसे में कामत का मानना है कि लार्ज-कैप स्पेस में सिर्फ इंडेक्स फंड्स में निवेश करना समझदारी नहीं है।

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