शेयर मार्केट में बड़ी संख्या में ट्रेडिंग करने वाले ट्रेडर्स को अक्सर ब्रोकरेज और टैक्स की तुलना में इंपैक्ट कॉस्ट (Impact Cost) से अधिक नुकसान होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए देश की सबसे बड़ी ऑनलाइन ब्रोकिंग फर्म जीरोधा (Zerodha) ने आइसबर्ग ऑर्डर (Iceberg Orders) नाम का एक फीचर लॉन्च किया है, जिसका मकसद इंपैक्ट लागत को कम करना है।
क्या होता है इंपैक्ट कॉस्ट?
मान लीजिए किसी कंपनी के शेयर 100 रुपये पर कारोबार कर रहे हैं और उसी समय एक ट्रेडर्स ने कंपनी के 1,000 शेयरों को मार्केट प्राइस पर खरीदने का ऑर्डर दिया। हालांकि यह ऑर्डर 100 रुपये की जगह 100.50 पैसे पर लगता है, तो यहां ट्रेडर्स को 500 रुपये अधिक राशि देनी पड़ती है। यही 500 रुपये इंपैक्ट कॉस्ट है।
जीरोधा का नया फीचर आइसबर्ग, एक ऑर्डर करने का तरीका है जो बड़े साइज के ऑर्डर को छोटे-छोटे ऑर्डर में बांट देता है। प्रत्येक ऑर्डर को तभी एक्सचेंज पर भेजा जाता है, जब उसके पिछला वाला ऑर्डर एग्जिक्यूट हो जाता है। ब्रोकरेज ने कहा कि यह F&O ट्रेडिंग करते समय क्वांटिटी फ्रीज लिमिट्स में भी मददगार है।
एक आइसबर्ग ऑर्डर कई छोटे-छोटे हिस्से में बंटा होता है और इसमें पहला हिस्से के एक्सचेंज पर एग्जिक्यूट होने के बाद ही बाकी हिस्से की बारी आती है। इस तरह शुरुआत में इस ऑर्डर का एक बेहद छोटा हिस्सा ही दिखता है और जब वह एग्जिक्यूट हो जाता है, तब बाकी सारे हिस्से धीरे-धीरे बाहर आते हैं। यह तब तक चलता रहता है, जब तक पूरी मात्रा एग्जिक्यूट नहीं हो जाती।
ऑर्डर की समयसीमा भी कर सकते हैं तय
बेंगलुरु मुख्यालय वाली जीरोधा ने एक ट्वीट में बताया, "आइसबर्ग फीचर के तहत एक ऑर्डर को कितने हिस्से में बांटना है, आप इसकी संख्या भी तय कर सकते हैं। साथ ही आइसबर्ग ऑर्डर के लिए एक समयसीमा भी दी जा सकती है। अगर उस समयसीमा के अंदर ये ऑर्डर एग्जिक्यूट नहीं होते हैं तो ये अपनेआप रद्द हो जाएंगे।"
जीरोधा के ट्वीट को आप नीचे देख सकते हैं-