Zoho के फाउंडर को जमा करना होगा $1.7 अरब का बॉन्ड, तलाक मामले में अमेरिकी अदालत का आदेश

Sridhar Vembu divorce case: अमेरिकी अदालत ने Zoho फाउंडर श्रीधर वेम्बू को तलाक मामले में 1.7 अरब डॉलर का बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है। मामला वैवाहिक संपत्तियों के ट्रांसफर, Zoho US री-स्ट्रक्चरिंग और कैलिफोर्निया के कम्युनिटी प्रॉपर्टी कानून से जुड़ा है। जानिए पूरी डिटेल।

अपडेटेड Jan 08, 2026 पर 10:21 PM
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श्रीधर वेम्बू और प्रमिला श्रीनिवासन की शादी लगभग तीन दशक चली।

Sridhar Vembu divorce case: अमेरिका की एक अदालत ने Zoho के फाउंडर श्रीधर वेम्बू (Sridhar Vembu) को चल रहे तलाक मामले में 1.7 अरब डॉलर का बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह आदेश तलाक की याचिका दाखिल होने के बाद वैवाहिक संपत्ति के बंटवारे पर पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए दिया।

अदालत ने चिंता क्यों जताई

The News Minute ने सबसे पहले रिपोर्ट किया था कि अदालत ने जनवरी 2025 के आदेश में कहा था कि तलाक की कार्यवाही शुरू होने के बाद संपत्तियों का ट्रांसफर, वैवाहिक संपत्ति की सुरक्षा के लिए लागू ऑटोमैटिक टेम्पररी रेस्ट्रेनिंग ऑर्डर का उल्लंघन है।


अदालत के मुताबिक, अगर इस तरह संपत्तियां इधर-उधर होती रहीं, तो संपत्तियों का निष्पक्ष बंटवारा मुश्किल हो सकता है। साथ ही, यह जोखिम भी बढ़ जाता है कि अंत में प्रतिवादी के पक्ष में कोई वित्तीय आदेश आया तो उसे लागू कर पाना कठिन हो जाएगा। खासकर, जब एसेट अमेरिका से बाहर ले जाई जाएं।

कैलिफोर्निया कानून क्या कहता है

अदालत ने California के फैमिली लॉ का हवाला देते हुए दोहराया कि शादी के दौरान कैलिफोर्निया में रहते हुए जो भी संपत्ति अर्जित की जाती है, उसे कम्युनिटी प्रॉपर्टी माना जाता है।

कम्युनिटी प्रॉपर्टी का मतलब है वो संपत्ति, जो शादी के दौरान पति और पत्नी ने साथ रहते हुए अर्जित की हो। ऐसे कानून वाले क्षेत्रों में यह माना जाता है कि शादी के बाद कमाई गई संपत्ति दोनों की बराबर हिस्सेदारी होती है, चाहे वह किसी एक के नाम पर क्यों न हो।

California कानून के तहत, शादी के दौरान अर्जित की गई संपत्ति को कम्युनिटी प्रॉपर्टी माना जाता है। यह नियम इस बात से अलग है कि संपत्ति अमेरिका के भीतर रखी गई है या विदेश में। और यह सभी तरह की संपत्तियों पर लागू होता है।

तलाक विवाद का आधार क्या है?

Sridhar Vembu और उनकी अलग रह रही पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन (Pramila Srinivasan) के बीच अमेरिका में तलाक की कार्यवाही चल रही है। विवाद का मुख्य मुद्दा शादी के दौरान अर्जित वैवाहिक संपत्तियों का बंटवारा है।

क्योंकि दोनों उस समय कैलिफोर्निया में रह रहे थे, इसलिए कानून के तहत इन संपत्तियों को संयुक्त स्वामित्व वाली माना जाता है, चाहे वे कहीं भी रखी गई हों।

भारत लौटने और तलाक की टाइमलाइन

श्रीधर वेम्बू 2019 के आखिर में भारत लौट आए थे और तमिलनाडु के Mathalamparai गांव में बस गए। वहीं से उन्होंने Zoho का संचालन शुरू किया। इसके बाद 2021 में उन्होंने तलाक की कार्यवाही शुरू की।

नवंबर 2024 में प्रमिला श्रीनिवासन ने अदालत में एक एक्स-पार्टी आवेदन दाखिल किया, जिसमें उन्होंने तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की। उनका कहना था कि एक प्रस्तावित लेन-देन के जरिए अमेरिका में मौजूद ऐसी कम्युनिटी एसेट, जो नियमित रूप से रेवेन्यू पैदा कर रही है, उसे किसी बाहरी पक्ष को सौंपा जा सकता है।

प्रमिला का कहना था कि अगर ऐसा हुआ तो तलाक की कार्यवाही के दौरान वैवाहिक संपत्ति का निष्पक्ष बंटवारा प्रभावित हो सकता है। इससे उनके हिस्से के अधिकार को नुकसान पहुंचने का जोखिम पैदा हो जाएगा।

Zoho US ऑपरेशंस की री-स्ट्रक्चरिंग पर सवाल

यह मामला Zoho के अमेरिकी ऑपरेशंस की री-स्ट्रक्चरिंग से जुड़ा है। अदालत ने एक मल्टी-स्टेप ट्रांजैक्शन की जांच की, जिसमें Zoho Corporation USA के बिजनेस को ट्रांसफर करने की योजना थी। उस समय यह कंपनी चेन्नई स्थित Zoho Corporation Pvt Ltd की पूरी तरह स्वामित्व वाली इकाई थी।

इसे वैवाहिक संपत्ति का हिस्सा माना जाता था। प्रस्ताव यह था कि इस बिजनेस को एक अलग कंपनी में शिफ्ट किया जाए। इस नई इकाई को Tony Thomas के नियंत्रण में रखने की योजना थी, जो श्रीधर वेम्बू के लंबे समय से सहयोगी हैं।

अदालत ने दलीलें क्यों खारिज कीं

अदालत ने वेम्बू, Zoho और T&V Holdings Inc. से जुड़े कुछ लेन-देन को लेकर दी गई सफाइयों को खारिज कर दिया। इसमें यह दलील भी शामिल थी कि यह री-स्ट्रक्चरिंग अमेरिका के Base Erosion and Anti-Abuse Tax (BEAT) से बचने के लिए की गई थी। अदालत ने इन कारणों को भरोसेमंद नहीं माना।

1.7 अरब डॉलर का बॉन्ड क्यों जरूरी

रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर अदालत इस नतीजे पर पहुंची कि प्रतिवादी यानी प्रमिला श्रीनिवासन के हितों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा बॉन्ड जरूरी है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि तलाक की कार्यवाही के अंत में वह कम्युनिटी एस्टेट में अपना हिस्सा हासिल कर सके।

अदालत ने कहा कि कम बॉन्ड राशि के पक्ष में याचिकाकर्ता यानी श्रीधर वेम्बू कोई ठोस वजह पेश नहीं कर पाए। वहीं, प्रतिवादी ने 1.7 अरब डॉलर के बॉन्ड के समर्थन में पर्याप्त सबूत दिए।

बॉन्ड जमा करने की समयसीमा

अदालत ने निर्देश दिया कि श्रीधर वेम्बू को 15 जनवरी 2025 से 45 दिनों के भीतर 1.7 अरब डॉलर का बॉन्ड जमा करना होगा। हालांकि, अब तक ऐसी कोई पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे यह पुष्टि हो सके कि यह बॉन्ड वास्तव में जमा किया गया है।

यह आदेश नवंबर 2024 में प्रमिला श्रीनिवासन द्वारा दायर एक आवेदन के बाद आया। इसमें उन्होंने दावा किया था कि श्रीधर वेम्बू ने उनकी जानकारी के बिना Zoho में अपनी बड़ी हिस्सेदारी बेच दी। हालांकि, वेम्बू ने इस आरोप से इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह भले Zoho के को-फाउंडर और लंबे समय तक CEO रहे, लेकिन उनकी कंपनी में हमेशा सिर्फ 5 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, अब Zoho में बहुमत हिस्सेदारी वेम्बू के भाई-बहनों के पास है, जो मिलकर 80 प्रतिशत से ज्यादा शेयर कंट्रोल करते हैं। 2025 की Forbes सूची के अनुसार, श्रीधर वेम्बू और उनके भाई-बहनों की कुल नेटवर्थ करीब 6 अरब डॉलर है।

वेम्बू और श्रीनिवासन की शादी लगभग तीन दशक चली और वे अपने बेटे के साथ अमेरिका में रहते थे। वेम्बू के 2019 के आखिर में भारत आने के बाद, साल 2021 में तलाक की कार्यवाही शुरू हुई।

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