Agri Commodity: भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक और निर्यातक है। पिछले साल करीब 40,000 करोड़ के 18 लाख टन स्पाइसेस निर्यात हुए थे। भारत के मसाला एक्सपोर्ट का वैल्यू लगभग 4 अरब डॉलर प्रति वर्ष है। घरेलू मसाला बाजार 10 अरब डॉलर से ज्यादा है।
Agri Commodity: भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उत्पादक और निर्यातक है। पिछले साल करीब 40,000 करोड़ के 18 लाख टन स्पाइसेस निर्यात हुए थे। भारत के मसाला एक्सपोर्ट का वैल्यू लगभग 4 अरब डॉलर प्रति वर्ष है। घरेलू मसाला बाजार 10 अरब डॉलर से ज्यादा है।
बता दें कि मिर्च जीरा, हल्दी, इलायची और मसाला मिक्स इन सभी मसालों का एक्सपोर्ट होता है। ये सभी मसालें चीन, USA और बांग्लादेश में किए जाते है।
मसालों का ग्लोबल मार्केट आंकड़ो पर नजर डालें तो 2025 में मसालों का ग्लोबल मार्केट 8.62 अरब डॉलर रहा था जबकि 2026 में यह बढ़कर 9.28 अरब डॉलर रहा है। वहीं बाजार का अनुमान है कि 2034 में मसालों का ग्लोबल बाजार 17,7 अरब डॉलर का हो सकता है। बता दें कि 2025 में एशिया ने 55.19% मार्केट शेयर के साथ भारत मसालों के ग्लोबल बाजार में लीडर पोजिशन पर था।
रबी 2026 के लिए MSP का बड़ा दांव
एग्री कमोडिटी से जुड़ी एक और अहम खबर आई है। रबी 2026 के लिए सरकार ने MSP का बड़ा दांव खेला है। सरकार ने MSP पर 18 लाख मीट्रिक टन से अधिक रबी फसलों की खरीद को मंजूरी दी है। कुल खरीद मूल्य 11,698 करोड़ के पार होगी। इस खरीद में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहां ₹9,341 करोड़ की खरीद को मंजूरी मिली। कीमत स्थिरता और किसानों को बेहतर रिटर्न देने पर जोर है। दालों में तुअर, उड़द, मूंग पर खास जोर है।
दालों पर फोकस
6.77 लाख मीट्रिक टन मसूर, 2.24 लाख मीट्रिक टन चना खरीद को मंजूरी मिली। किसानों को MSP पर अपनी फसल बेचने का सुनिश्चित अवसर मिलेगा। खरीद प्रक्रिया NAFED और NCCF जैसी केंद्रीय एजेंसियों के जरिए होगी। PCF और UPSS जैसी राज्य एजेंसियां भी शामिल रहेंगी। किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान (DBT) किया जाएगा।
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