बासमती चावल की मांग में इजाफा के चलते नए सीजन में इसके भाव में तेज उछाल दिख रही है। इसकी सबसे अधिक खरीदारी मिडिल ईस्ट और यूरोप में होती है और यहां मांग बढ़ने के चलते भाव में तेज उछल दिख रही है। थोक अनाज बाजारों में थोक खरीदारों को पिछले साल की तुलना में 10% से 15% अधिक पेमेंट करना पड़ रहा है। किसानों के मुताबिक पिछले महीने बासमती चावल के निर्यात के लिए न्यूनतम कीमत 1,200 डॉलर प्रति टन से घटाकर 950 डॉलर प्रति टन कर दी जिसके चलते एक्सपोर्ट्स ऑर्डर में तेज उछाल आई। इस वजह से कीमतें भी बढ़ गईं। इस महीने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने जानकारी दी थी कि भारत से करीब 5 लाख टन नए बासमती चावल के लिए एक्सपोर्ट कॉन्ट्रैक्ट हो चुके हैं।
हरियाणा के एक किसान सुक्रमपाल बेनीवाल का कहना है कि बासमती चावल की एक टॉप वैरायटी की थोक बाजार में कीमत पिछले साल के 45,000 रुपये प्रति टन से बढ़कर लगभग 50,000 रुपये ($ 599.93) प्रति टन हो गई है। सुक्रमपाल के मुताबिक बाकी किस्मों की कीमतें भी पिछले साल के 40,000 रुपये के मुकाबले 46,000 रुपये प्रति टन तक पहुंच गई हैं। उन्होंने बताया कि मिल वाले और निर्यातक बासमती चावल खरीदने के लिए थोक बाजारों में आ रहे हैं जिससे मांग में तेजी के संकेत दिख रहे हैं।
सालाना 40 लाख टन चावल होता है निर्यात
भारत से सालाना 40 लाख टन से अधिक बासमती चावल ईरान, इराक, यमन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और संयुक्त राज्य अमेरिका समेत अन्य देशों को निर्यात होता है। लंबे किस्म का यह चावल अपनी सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। यूरोप में भी इसका बाजार काफी बड़ा है। घरेलू मार्केट में इसकी कीमतों को स्थिर करने के लिए भारत ने जुलाई में गैर-बासमती सफेद चावल के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था और बाद में बासमती चावल के निर्यात के लिए न्यूनतम मूल्य भी निर्धारित किया था।