कायनात चैनवाला, कोटक सिक्योरिटीज
कायनात चैनवाला, कोटक सिक्योरिटीज
Commodity market : यूएस फेड द्वारा लगातार तीसरी बार रेट कट के बाद कमोडिटी मार्केट के अच्छे माहौल पर AI बबल के नए डर ने पानी फेर दिया। 12 दिसंबर को खत्म हुए हफ्ते में अमेरिकी डॉलर 0.6 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। इसमें लगातार तीसरे हफ़्ते की गिरावट जारी रही। फेड द्वारा महंगाई पर नरम रुख के साथ उम्मीद के मुताबिक 25 बेसिस प्वाइंट की रेट कटौती के बाद दरों में कटौती की गई। यूएस फेड के अधिकारियों ने 2026 के ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 2.3 प्रतिशत कर दिया और उम्मीद जताई कि महंगाई कम होकर 2.4 प्रतिशत हो जाएगी। आगे भी 0.25 फीसदी रेट कट का अनुमान बनाए रखा गया है जो एक सतर्क रुख का संकेत है। 12 दिसंबर से हर महीने 40 बिलियन डॉलर के ट्रेजरी बिल खरीदने की योजनाओं से नरम मौद्रिक नीति कायम रहने की धारणा को और बल मिला है।
फेड के डॉट प्लॉट से पता चलता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए ज़्यादा बड़ी चिंता लेबर मार्केट की कमज़ोरी है या लगातार बनी हुई महंगाई, इस बात पर पॉलिसी बनाने वालों के बीच मतभेद है। इसके चलते फेड के आउटलुक में लगातार बनी अनिश्चितता का संकेत मिलता है।
FOMC के फैसले के बाद US इक्विटी मार्केट में शुरूआत में तेज़ी आई। इसके चलते अमेरिकी इक्विटी इंडेक्स नए रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए। हालांकि, हफ्ते के आखिर में सेंटिमेंट कमज़ोर हो गया। AI से जुड़े शेयरों के महंगे वैल्यूएशन को लेकर नई चिंताओं के कारण शुक्रवार को अमेरकी शेयरों में तेज़ गिरावट आई। नैस्डैक हफ्ते के आखिर में 1.6 प्रतिशत नीचे बंद हुआ, S&P 500 1 प्रतिशत गिरा, जबकि डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज ने बेहतर प्रदर्शन किया और बीते हफ्ते 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ क्लोज हुआ।
कीमती धातुओं में तेज़ से उछाल
कीमती धातुओं में तेज़ से उछाल आया क्योंकि डॉलर दो महीने के निचले स्तर के करीब आ गया और अमेरिका में शुरुआती बेरोज़गारी के दावे चार साल से ज़्यादा के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गए। शुक्रवार को COMEX सोना 4,388 डॉलर प्रति औंस और चांदी रिकॉर्ड 65 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। हालांकि, दोनों धातुओं में क्लोजिंग के समय प्रॉफिट बुकिंग देखी गई। इसके चलते सोना 4,330 डॉलर के नीचे और चांदी 62 डॉलर के करीब बंद हुई। फिर भी इन्होंने लगभग 2 प्रतिशत और 5 प्रतिशत की मज़बूत वीकली बढ़त दर्ज की।
वीकली चार्ट पर, MCX गोल्ड फ्यूचर्स ने 2 प्रतिशत से ज़्यादा के वीकली गेन के साथ अब तक की सबसे हाईक्लोजिंग देखी। लगातार पांचवें हफ्ते की बढ़त काउंटर में ज़बरदस्त तेज़ी की पुष्टि करती है। डेली चार्ट पर, इसकी कीमत लगातार 20 EMA और सुपरट्रेंड (7,3) से ऊपर बनी हुई है, जिससे पता चलता है कि शॉर्ट-टर्म बुलिश रुझान बरकरार है।
साइडवेज रह सकता है MCX गोल्ड फ्यूचर्स
जब तक MCX गोल्ड फ्यूचर्स की कीमत 1,29,000 रुपये के इमीडिएट सपोर्ट से ऊपर बनीरहती है, तब तक इसमें इस हफ़्ते 1,37,000 रुपये के शुरुआती रेजिस्टेंस की ओर बढ़ने की उम्मीद कायम रहेगी। इस लेवल से ऊपर ब्रेकआउट देनें और लगातार इसके ऊपर ट्रेड होने से मोमेंटम 1,40,000 रुपये की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, 1,29,000 रुपये से नीचे जाने पर मौजूदा मोमेंटम थम सकता है और काउंटर साइडवेज़ रुझान दिखा सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव
कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव देखने को मिला है। WTI इस हफ़्ते लगभग 4 प्रतिशत गिरकर 57 डॉलर प्रति बैरल के पास स्थित दो महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। ओवरसप्लाई की चिंताओं ने बाज़ार का सेंटिमेंट बिगाड़ दिया। IEA ने रूस और वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों के असर और उम्मीद से ज़्यादा मज़बूत डिमांड का हवाला देते हुए 2026 के लिए अपने तेल सरप्लस के अनुमान को 4.09 mbpd से घटाकर 3.84 mbpd कर दिया है। इसके बावजूद इन्वेंट्री में रिकॉर्ड बढ़त की उम्मीद है।
बेस मेटल्स के लिए उतार-चढ़ाव भरा रहा बीता हफ्ता
बेस मेटल्स के लिए यह हफ़्ता उतार-चढ़ाव भरा और मिला-जुला रहा। ज़िंक एकमात्र मेटल था जो बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि कॉपर और एल्युमिनियम गिरावट के साथ बंद हुए। इसके बावजूद कि लगातार दो हफ़्ते की बढ़त के बाद कॉपर 11,500 डॉलर प्रति टन से ऊपर बना रहा। फेड के रेट कट के बाद कॉपर थोड़े समय के लिए 11,950 डॉलर प्रति टन के नए रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंच गया। सप्लाई में लगातार बनी कमी ने इस पूरे सेक्टर को सहारा दिया। चिली और पेरू में खदानों में आई दिक्तों, अयस्क की क्वालिटी में गिरावट और परमिट मिलने में देरी से कॉपर का उत्पादन प्रभावित हुआ।
सेंट्रल बैंकों के फैसलों पर रहेगी नजर
इस हफ्ते तमाम आर्थिक आंकड़े और सेंट्रल बैंक के फ़ैसले आने वाले हैं। इसके चलते कमोडिटी मार्केट में काफी उठापटक देखने को मिल सकती है। कमोडिटी मार्केट की नजर अमेरिकी जॉब डेटा, चीन के अहम आर्थिक आंकड़ों और BoJ की पॉलिसी पर रहेगी। कमजोर चाइनीज आंकड़ों से नए स्टिमुलस की उम्मीदें बढ़ सकती हैं, जिसे बीजिंग के प्रोएक्टिव फिस्कल रुख और 2026 के लिए थोड़ी ढीली मॉनेटरी पॉलिसी से सपोर्ट मिलेगा।
फाइनेंशियल मार्केट में और ज़्यादा वोलैटिलिटी की उम्मीद
पॉलिसी के फ्रंट पर नजर डालें तो बैंक ऑफ़ जापान कमज़ोर येन और बढ़ती महंगाई के बीच 11 महीनों में पहली बार ब्याज दरें बढ़ा सकता है। बैंक ऑफ़ इंग्लैंड से 25 bps की कटौती की उम्मीद है, जबकि ECB दिसंबर में दरों को स्थिर रख सकता है। इसके चलते कमोडिटी बाज़ार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अगर बैंक ऑफ़ जापान ब्याज दर में बढ़ोतरी करता है तो जापान की बेंचमार्क दर तीन दशकों में पहली बार 0.5 प्रतिशत से ऊपर चली जाएगी। इससे "येन कैरी ट्रेड" में उलटफेर हो सकता है। जिससे ग्लोबल इक्विटी से पूंजी की निकासी हो सकती है और फाइनेंशियल मार्केट में और ज़्यादा वोलैटिलिटी आ सकती है।
कायनात चैनवाला कोटक सिक्योरिटीज में कमोडिटी रिसर्च की सीनियर मैनेजर हैं.
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