Commodity Market: इंटरनेशनल मार्केट में चीनी की कीमतें 2 महीनों की ऊंचाई के करीब पहुंच गई हैं। इंटरनेशनल मार्केट में चीनी के दाम चढ़े। 2 महीनों की ऊंचाई के भाव करीब पहुंचे। 14.7 सेंट/पाउंड के ऊपर भाव निकलें। एथेनॉल डायवर्जन बढ़ने की उम्मीद से तेजी आई। क्रूड में तेजी से डायवर्जन बढ़ने की उम्मीद है। डायवर्जन बढ़ने से चीनी की सप्लाई गिरेगी। 2026-27 में ब्राजील में एथेनॉल उत्पादन बढ़ेगा। ब्राजील में एथेनॉल उत्पादन 4 बिलियन संभव है।
दुनिया में चीनी के हालात पर नजर डालें तो 2025/26सीजन में 1.39 मिलियन टन सरप्लस था जबकि 2026/27 सीजन के लिए 1.5 मिलियन टन डेफिसिट है।
सरकार ने CCI को MSP फंडिंग को मंजूरी दी। कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) ने कपास सीजन 2023-24 के लिए MSP भुगतान के लिए 1,718.56 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इस कदम से बाजार में गिरती कीमतों के बीच किसानों को बड़ा सहारा मिलेगा और उन्हें अपनी उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित हो सकेगा।
सरकार ने कपास की MSP खरीद के लिए CCI को केंद्रीय नोडल एजेंसी नियुक्त किया है। बता दें कि जब बाजार में कपास की कीमत MSP से नीचे चली जाती है, तब CCI किसानों से फेयर एवरेज क्वालिटी (FAQ) का कपास बिना किसी मात्रा सीमा के खरीदती है। इससे किसानों को अपनी फसल का उचित दाम मिल पाता है और उन्हें नुकसान से बचाया जाता है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2023-24 सीजन में देश में करीब 325 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ। इस दौरान बाजार में कीमतें MSP से नीचे जाने पर सरकार की एजेंसी CCI ने किसानों से MSP पर खरीद की। इस प्रक्रिया में करीब 33 लाख गांठ कपास की खरीद की गई, जिससे लगभग 7.25 लाख किसानों को सीधा फायदा मिला। साथ ही कैबिनेट ने कपास सीजन 2023-24 के दौरान MSP ऑपरेशन में हुए ₹1,718 करोड़ के खर्च की भरपाई को भी मंजूरी दे दी है।
अमेरिका और ईरान की जंग के कारण कच्चा तेल लागातर 116 डॉलर के पार निकल गया है। 1 हफ्ते की ऊंचाई पर कच्चा तेल पहुंचा। MCX पर भी भाव `9100 के पार निकला। US-ईरान जंग गहराने से उबाल आय़ा।
पाम ऑयल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर
वेस्ट एशिया में हो रही जंग की आंच आपके किचन तक पहुंच गई है। खाने के तेलों के दाम 12 से 15 रुपए प्रति लीटर बढ़ गए हैं और अभी खाद्य तेल और महंगे होंगे क्योंकि अब फर्टिलाइजर की कमी से मलेशिया में पाम ऑयल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। भारत दुनिया में सबसे बड़ा खाने के तेल का इंपोर्टर है और मांग का 55-60% तक खाने के तेल का इंपोर्ट होता है
फर्टिलाइजर की कमी के चलते मलेशिया में पाम ऑयल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए है। कमी को देखते हुए मलेशिया ने निर्यात ड्यूटी भी बढ़ा दी है। यानी खाद्य तेल अभी और महंगे होंगे।