Cotton Price- देश में कॉटन के दाम लगातार 30000 रुपए के ऊपर बने हुए हैं। एक तरफ इंडस्ट्री माल की कमी से परेशान है तो दूसरी तरफ एक्सपोर्टर्स कॉटन के भाव से। बता दें कि कॉटन के दाम ग्लोबल कीमतों से 15% ज्यादा है। उधर MCX पर जनवरी का कॉन्ट्रैक्ट अभी तक शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में 2023 में कॉटन की क्या रह सकती है चाल? आइए डालते है विस्तार से एक नजर।
MCX पर कॉटन में तेजी जारी है। लगातार चौथे महीने भाव कॉटन का भाव 31,000 रुपये के ऊपर बना हुआ है। आपको बता दें कि कॉटन के भाव मार्च 2022 से चढ़ने शुरू हुए थे। जून वायदा 52000 के पार निकला था । वहीं अगस्त में भी दाम 51000 के पार थे जबकि स्पॉट भाव 1 लाख के पार निकले थे। हालांकि सितंबर से कीमतों में गिरावट आनी शुरु हुई। लेकिन मौजूदा समय में देश में कॉटन का भाव ग्लोबल से 15% ज्यादा है । कॉटन की कीमतें ज्यादा होने से इसके इंपोर्ट में दिक्कतें आ रही है। वहीं लागत बढ़ने से 50% से ज्यादा मिल्स बंद हुए हैं और बाकी मिल्स अपनी आधी क्षमता पर काम कर रहे हैं।
इसी तरह कपास की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है। लगातार दूसरे महीने कपास का भाव 1700 के पार निकला है। केवल अक्टूबर में ही कपास की कीमत 1600 रुपये के नीचे थे। लेकिन अब दिसंबर में एक बार फिर इसकी कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है और यह 1,725.50 रुपये तक पहुंचा है। वहीं जनवरी-फरवरी 2022 में इसकी कीमत 2000 के पार निकले थे।
एमसीएक्स पर कॉटन की 5 बड़ी चाल पर नजर डालें तो जून 2022 में इसकी कीमत 52,410 रुपये प्रति बेल्स थी जबकि अगस्त में यह 51,090 रुपये प्रति बेल्स पर पहुंची थी। इसी तरह मई में एमसीएक्स पर कॉटन 50,330 रुपये प्रति बेल्स, अप्रैल में 46,000 रुपये प्रति बेल्स पर थी।
एमसीएक्स पर कॉटन की चाल पर नजर डालें तो 1 हफ्ते में इसमें 3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है जबकि 1 महीने में यह 9 फीसदी टूटा है। वहीं 1 साल में इसमें 10 फीसदी की गिरावट आई है। इस बीच अमेरिका में कॉटन की चाल पर नजर डालें तो 1 हफ्ते में इसमें 7 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है जबकि 1 महीने में यह 4 फीसदी भागा है। वहीं 1 साल में इसमें 20 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है।
भारत में कॉटन के उत्पादन पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2017-18 में 370 लाख बेल्स कॉटन का उत्पादन हुआ था। जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में 365लाख बेल्स कॉटन, वित्त वर्ष 2020-21 में 354 लाख बेल्स और 2021-22 लाख बेल्स उत्पादन हुआ है।
भारत में कॉटन के एक्सपोर्ट पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2017-18 में 67.59 लाख बेल्स कॉटन का एक्सपोर्ट हुआ था। जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में 47.04 लाख बेल्स कॉटन, वित्त वर्ष 2020-21 में 77.59 लाख बेल्स और 2021-22 में 45.00 लाख बेल्स कॉटन एक्सपोर्ट हुआ है।
वहीं कॉटन के इंपोर्ट पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2017-18 में 15.80 लाख बेल्स कॉटन का इंपोर्ट हुआ था। जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में 15.50 लाख बेल्स कॉटन, वित्त वर्ष 2020-21 में 11.03 लाख बेल्स और 2021-22 में 10.50 लाख बेल्स कॉटन इंपोर्ट हुआ है।
CPAI ने की SEBI से अपील करते हुए कहा कि वायदा पर नियम जल्द लाने की अपील है। MCX ने नियमों में बदलाव की बात कही थी। जनवरी 2023 से सौदों की मंजूरी नहीं है। मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट 30 दिसंबर को एक्सपायर होगा। एक्सपायरी के 5 दिन पहले डिलीवरी में चला जाएगा। नए सौदों के मंजूरी न होने से हेजिंग संभव नहीं है। बाजार में अनिश्चित्ता का माहौल फैला हुआ है।
DD कॉटन के एमडी अरुण शेखसरिया का कहना है कि डिमांड में कमी देखने को मिली है। आगे के 3-4 महीने में कॉटन की कीमतें दबाव में रहेगी। कॉटन निर्यात भी कम रहने का अनुमान है।