Edible Oil: गिर सकती है रिफायनर्स की आय, क्रिसिल ने जताया अनुमान, क्या आगे सस्ते होंगे दाम

Edible Oil: खाने के तेलों की कीमतों में आगे दबाव देखने को मिल सकता है। क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में खाने के तेलों के आय घटने की आशंका जताई है। क्रिसिल का कहना है कि रिफायनर्स की आय 2-3% गिरने की आशंका है

अपडेटेड Jul 16, 2025 पर 2:02 PM
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देश में खाने के तेल का इंपोर्ट आंकड़ों पर नजर डालें तो दिसंबर 2024 में 12.31 लाख टन का इंपोर्ट हुआ था जबकि जनवरी 2025 में 10.49 लाख टन खाने के तेल का इंपोर्ट हुआ।

Edible Oil:  खाने के तेलों की कीमतों में आगे दबाव देखने को मिल सकता है। क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में खाने के तेलों के आय घटने की आशंका जताई है। क्रिसिल का कहना है कि रिफायनर्स की आय 2-3% गिरने की आशंका है। रिफायनर्स की आय 2.6 लाख करोड़ संभव है।

क्रिसिल के मुताबिक खाने के तेल की मांग गिरने से आय गिर सकती है। आगे खाने के तेल के दाम गिरने की उम्मीद है। सोया, पाम, सन ऑयल के दाम गिर सकते हैं।

देश में खाने के तेल का इंपोर्ट आंकड़ों पर नजर डालें तो दिसंबर 2024 में 12.31 लाख टन का इंपोर्ट हुआ था जबकि जनवरी 2025 में 10.49 लाख टन खाने के तेल का इंपोर्ट हुआ। वहीं फरवरी 2025 में 9 लाख टन, मार्च 2025 में 9.98 लाख टन , अप्रैल 2025 में 8.92 लाख टन का इंपोर्ट हुआ। मई 2025 में 11.87 लाख टन खाने का तेल का इंपोर्ट हुआ।


देश में सरसों के उत्पादन आंकड़ों पर नजर डालें तो 2019-20 में 91.24 लाख टन सरसों का उत्पादन हुआ जबकि साल 2020-21 में 102.10 लाख टन, 2021-22 में 119.63 लाख टन, 2022-23 में 126.43 लाख टन और 2024-25 में 126.06 लाख टन उत्पादन हुआ।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी

स्वास्थ्य मंत्रालय ने हाल के दिनों में कैंटीन और इटरीज के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि कैंटीन खाने में कैलोरी की जानकारी दें। बोर्ड के जरिए चीनी, तेल की जानकारी दें। बोर्ड लगाकर समोसे में कितना तेल बताएं। तेल और शक्कर' की चेतावनी बोर्ड लगाएं। देश में मोटापे, डायबिटीज के मरीज बढ़ रहे हैं। हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियां बढ़ रही हैं। सरकार बढ़ते मामले को कम करना चाहती है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि, उसके इस सलाह का उद्देश्य किसी खास स्नैक या स्ट्रीट फूड को निशाना बनाना नहीं है। इसमें विक्रेताओं द्वारा बेचे जाने वाले खाद्य उत्पादों पर किसी तरह का चेतावनी लेबल लगाने की बात नहीं की गई है, और न ही किसी विशेष भारतीय नाश्ते को लेकर कोई निर्देश दिया गया है। यह एक सामान्य जागरूकता पहल है, जो लोगों को यह समझाने के लिए बनाई गई है कि रोजमर्रा के खाने-पीने की चीज़ों में छुपे फैट और एक्स्ट्रा शुगर से स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ सकता है।

IVPA सुधाकर देसाई का कहना है कि खाने के तेल की मांग गिरी है। जून में इंपोर्ट बढ़ने की उम्मीद है। पाम के दाम चढ़ने से सरकार ने दूसरे विकल्प भी देखे है। 60-70 मिलियन से ज्यादा लोग आज मोटापे का शिकार है। लोगों के पास भी खरीदारी करने के लिए नए मौके होंगे। वहीं इंडस्ट्रीज के पास भी सही प्रोडक्ट लाने का मौका है।

 

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