Gold ETF: दुनिया में गोल्ड ETF की मांग गिरी लेकिन भारत में मांग बरकार है। नवंबर में लगातार 8वें महीने गोल्ड ETF में रिकॉर्ड निवेश हुआ है। नवंबर में गोल्ड ETF में $17.5 करोड़ निवेश का हुआ। सोने की मांग बढ़ने से ETF में निवेश बढ़ा है। बाजार जानकारों का मानना है कि शेयर बाजार की उथल-पुथल के कारण भी गोल्ड ETF में ज्यादा निवेश हुआ है।
बता दें कि दुनिया में सबसे ज्यादा गोल्ड ETF की मांग चीन में गिरी है। चीन में गोल्ड ETF में निवेश $14.5 करोड़ घटा है। 20 महीनों के बाद ETF में निवेश घटा है।
गौरतलब हो कि इस साल यूनियन बजट में सरकार ने गोल्ड ETF टैक्स के नियमों में बदलाव किया है। अब गोल्ड ईटीएफ की यूनिट्स एक साल के बाद बेचने पर 12.5 फीसदी के रेट से कैपिटल गेंस टैक्स लगेगा। पहले इनवेस्टर के टैक्स स्लैब के हिसाब से कैपिटल गेंस पर टैक्स लगता था।
आज भी गोल्ड निवेश का सबसे सुरक्षित जरिया माना जाता है। इनफ्लेशन, आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध या किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में गोल्ड एकमात्र ऐसी चीज है, जिसकी वैल्यू खत्म नहीं होती है। इसलिए गोल्ड में निवेश की वजह सिर्फ रिटर्न हासिल करना नहीं है। यह निवेशक को विपरीत स्थितियों में आर्थिक सुरक्षा देता है।
क्या है एक्सपर्ट्स की राय
IBJA के सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने कहा कि SGB बंद होने के बाद गोल्ड ETF में निवेश बढ़ा है। भारत में गोल्ड ETF की मांग बढ़ी है। दुनिया में 29 टन की मांग कम हुई है। $2.1 बिलियन की बिक्री के बाद भी सोने के दाम में 9% की गिरावट आई है।
सुरेंद्र मेहता ने आगे कहा कि चाइना ने फिर से सोने की खरीदरी शुरू की है। गोल्ड में निवेश से जीएसटी बेनिफिट होते है। मार्च 2026 तक सोने की मांग बरकरार रहेगी। सुरेंद्र मेहता ने आगे कहा कि 15 -16 महीनों में 15-16 फीसदी का रिटर्न गोल्ड से मिल सकता है।
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