Gold Price : देश की सबसे बड़ी प्रेसियस मेटल रिफाइनर कंपनी के मुताबिक भारतीय ज्वेलर्स मांग के सबसे व्यस्त सीजन से पहले सोना खरीदने से बच रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि हाल ही में कीमतों में आई गिरावट का सिलसिला अभी और आगे बढ़ सकता है। सरकारी कंपनी MMTC लिमिटेड और स्विस रिफाइनरी PAMP SA के ज्वाइंट वेंचर MMTC-PAMP इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सीईएओ और मैनेजिंग डायरेक्टर समित गुहा ने कहा कि बड़े ज्वेलरी चेन अभी तक पूरी तरह से बाजार में नहीं लौटे हैं। इसके बजाय,छोटे और मध्यम आकार के ज्वैलर्स की ओर से खरीदारी हो रही है,जिनमें से कुछ ने दोबारा ऑर्डर भी दिए हैं। आमतौर पर सोने की कुल खरीदारी में बड़े ज्वेलरी चेन का बड़ा हिस्सा होता है।
पिछले हफ्ते सोने का भाव जुलाई के बाद पहली बार 4,000 डॉलर प्रति औंस से नीचे आ गया। फरवरी के आखिर में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से इसके भाव में लगभग 24% की गिरावट आई है। जनवरी में इसकी कीमतें 5,400 डॉलर के पार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं।
समित गुहा ने बताया कि आभूषण बनाने वाली बड़ी कंपनियां आमतौर पर कीमतों में बढ़ोतरी शुरू होने पर खरीदारी बढ़ा देती हैं, ताकि वे सोने के और महंगा होने से पहले ही अपनी सप्लाई सेफ कर सकें। वहीं, जब उन्हें आगे और गिरावट की उम्मीद होती है,तो वे अपने पास मौजूद स्टॉक को कम करने लगती हैं।
दुनिया के दूसरे सबसे बड़े सोने के खपत वाले देश में, इस साल सोने की मांग सुस्त रही है। मई में सरकार ने आयात शुल्क (import duty) को दोगुने से भी ज़्यादा बढ़ाकर 15% कर दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी भारतीयों से बार-बार अपील की है कि वे सोने की खरीदारी कम करें,ताकि बढ़ते व्यापार घाटे को नियंत्रित किया जा सके। इससे सोने के मांग पर दबाव बना है। भारत अपनी जरूरत का लगभग सारा सोना आयात करता है। आयात शुल्क बढ़ने की वजह से अब सोने की ज्यादातर खरीद-बिक्री अनौपचारिक बाजारों (under-the-counter cash markets) में नकद के जरिए होने लगी है।
समित गुहा ने कहा," आयात शुल्क में बढ़ोतरी से हमारी खरीदारी पर असर पड़ा है।"
भारत में बरती जाने वाली यह सावधानी चीन की स्थिति से अलग है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता है,जहां हाल ही में कीमतों में गिरावट आने के बाद घरेलू मांग में तेजी आई है। खासकर ऐसे समय में जब मांग अपने सबसे मजबूत दौर में होती है भारत में सोने की खरीदारी को लेकर हिचकिचाहट कमजोरी के संकेतों को और मजबूत कर रही है। आमतौर पर अक्टूबर से दिसंबर के बीच सोने की सबसे ज्यादा खरीदारी होती है। इसी अवधि में दिवाली का त्योहार भी पड़ता है जो इस साल 8 नवंबर को है।
सिटी रिसर्च के मुताबिक आयात के कड़े नियमों और अल नीनो के कारण मॉनसून में कमजोरी के चलते ग्रामीण इलाकों में मांग कमजोर रहने से भारत के सोने के आयात में कमी आने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अक्टूबर से दिसंबर के बीच सोने का आयात लगभग 106 टन रह सकता है,जो कि चौथी तिमाही के लॉन्ग टर्म औसत 212 टन का लगभग आधा है।
समित गुहा ने बताया कि MMTC-PAMP की सोने की बिक्री पिछले साल के स्तर से कम रही है। मुख्य रूप से छोटे सिक्कों और बार की मांग ज्यादा है। सितंबर में बिक्री लगभग पिछले साल के बराबर ही रही,जबकि अक्टूबर में खरीदारी में थोड़ी तेजी आई है। अगर सोने की कीमतों में सुधार आता है तो खरीदारी में तेजी देखने को मिल सकती है।
डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।