Gold price : सरकार इक्विटी मार्केट से हटा कर सोने में बढ़ाना चाहती है निवेशकों का रुझान-एक्सपर्ट्स

Gold price : 2024 की दूसरी तिमाही में गहने के लिए सोने की मांग 19 फीसदी घटी है। वहीं, इसकी इन्वेंटरी मांग 36 फीसदी बढ़ी है। सोने पर वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का कहना है कि 2024 की दूसरी तिमाही में सोने की मांग 6 फीसदी गिरी है। सोना 17 जुलाई को रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंचा था। सोने का अगस्त वायदा 74,731 रुपए तक पहुंचा था

अपडेटेड Jul 31, 2024 पर 3:35 PM
टेक्नोलॉजी में सोने का इस्तेमाल 11 फीसदी बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सोने की मांग में 1 फीसदी का इजाफा हुआ है

Commodity market : सोने-चांदी की चमक फिर से लौटी है। MCX पर सोना 69500 के पार निकल गया है। सोने का भाव लाइफ हाई से अभी भी 5200 रुपए कम है। सोना 17 जुलाई को रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंचा था। सोने का अगस्त वायदा 74,731 रुपए तक पहुंचा था। वहीं, सोने का अक्टूबर वायदा 75,128 रुपए तक पहुंचा था। इस बीच एमसीएक्स पर चांदी का भाव 83000 रुपए के पार निकल गया है। 11 जुलाई को चांदी रिकॉर्ड 94,590 रुपए तक पहुंची थी। इस बीच डॉलर इंडेक्स 104 के पार कायम है।

सोने पर वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल

सोने पर वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का कहना है कि 2024 की दूसरी तिमाही में सोने की मांग 6 फीसदी गिरी है। सोने के गहनों की मांग 19 फीसदी गिरी है। सेंट्रल बैंकों की खरीद 6 फीसदी बढ़ी है। गोल्ड ETF में थोड़ी गिरावट दिखी है। टेक्नोलॉजी में सोने का इस्तेमाल 11 फीसदी बढ़ा है। सोने की माइनिंग 3 फीसदी बढ़ी है। वहीं, रीसाइक्लिंग 4 फीसदी बढ़ी है।


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Q2 में सोने की मांग

2024 की दूसरी तिमाही में गहने के लिए सोने की मांग 19 फीसदी घटी है। वहीं, इसकी इन्वेंटरी मांग 36 फीसदी बढ़ी है। टेक्नोलॉजी में सोने का इस्तेमाल 11 फीसदी बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सोने की मांग में 1 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं, इसकी निवेश मांग सिर्फ 1 फीसदी बढ़ी है। सेंट्रल बैंक की मांग 6 फीसदी बढ़ी है। वहीं, इसकी कुल मांग 6 फीसदी घटी है। 2023 की दूसरी तिमाही में सोने की मांग 993 टन थी जो 2024 की दूसरी तिमाही में घटकर 929 टन पर आ गई। 2023 की तीसरी में सोने की मांग 1174 टन थी। वहीं, 2023 की चौथी तिमाही में सोने की मांग 1134 टन थी। 2024 की पहली तिमाही में सोने की मांग 1115 टन थी।

IBJA (इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन)  के सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता का कहना है कि वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट पर नजर डालने पर पता चलता है कि तिमाही आधार पर सोने की ओवर ऑल मांग में कोई बड़ी गिरावट नहीं आई है। लेकिन ज्वेलरी के लिए होने वाली मांग घटी है। वहीं, निवेश मांग काफी बढ़ी है। अप्रैल-जून तिमाही में आम तौर पर ज्वेलरी की खरीद कम होती। लोग फेस्टिव सीजन में कनवर्जन के लिए इस समय अक्सर गोल्ड क्वाइन या बार की खरीद करते हैं। इस बार ज्यादा शादियां भी नहीं थी इसलिए ज्वेलरी की मांग में इतनी बड़ी गिरावट देखने को मिली।

उन्होंनें आगे कहा कि तिमाही में चीन में गोल्ड डिमांड बहुत कम रही। वहीं भी इस अवधि में ज्वेलरी की डिमांड 52 फीसदी गिर गई। इसका असर भी गोल्ड डिमांड पर देखने को मिला है। वहां भी ज्वेलरी की डिमांड गिरी है लेकिन बार्स और क्वाइंस की मांग बड़ी है। ये एक इंटरनेशनल ट्रेड बन गया है। लोगों को इस समय ज्वेलरी से ज्यादा बार्स और क्वाइंस पर भरोसा है। बढ़ते जियो पोलिटिकल तनाव के चलते सेंट्रल बैंक गोल्ड की खरीद कर रहे हैं।

सरकार सोने के प्रति बढ़ाना चाहती है निवेशकों का रुझान

सुरेंद्र मेहता का कहना है कि सरकार शेयर बाजार से लोगों ध्यान हटा कर सोने में उनका रुझान बढ़ाना चाहती है। इसी सोने पर ड्यूटी घटाई गई है।  उनका कहना है कि गोल्ड ने इस समय एक बेस बना लिया है। लेकिन एक बात साफ है की  गोल्ड का बाजार आगे काफी वोलेटाइल रहेगा। सितंबर में अमेरिका में दरें घटने का पूरी उम्मीद है। अमेरिका में दरें घटने के बाद सोने में जोरदार तेजी आएगी। सोने के लिए अब पहला टारगेट 2550 डॉलर प्रति औंस का होगा। वहीं, अगला टारगेट 2650 डॉल का होगा। धनतेरस तक ये टारगेट आसानी से हासिल हो जाएगा।

 

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