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Gold Price: सोने में आई तेजी की क्या वजह मानता है मोतीलाल ओसवाल, जानें क्या अब भी निवेश का कोई बचा है मौका?

Gold Price: नवनीत दमानी का कहना है कि सोना अब तेज़ी से “नॉन-सॉवरेन मनी” के तौर पर काम कर रहा है ,जो राजनीतिक रूप से प्रभावित सिस्टम से बाहर का एसेट है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस सोच ने सोने को कई इन्वेस्टर्स के लिए एक टैक्टिकल हेज से एक स्ट्रेटेजिक रिज़र्व एलोकेशन में बदल दिया है

Edited By: Sujata Yadavअपडेटेड Feb 25, 2026 पर 11:32 AM
Gold Price: सोने में आई तेजी की क्या वजह मानता है मोतीलाल ओसवाल, जानें क्या अब भी निवेश का कोई बचा है मौका?
भारत समेत कई उभरते मार्केट में करेंसी में गिरावट ने लोकल सोने की कीमतों को बढ़ा दिया है और घरेलू डिमांड को मज़बूत किया है।

Gold Price:  सोना उस दौर में आ गया है जिसे एनालिस्ट स्ट्रक्चरल रीप्राइसिंग फेज़ कहते हैं, क्योंकि ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम में गहरे बदलाव इन्वेस्टर्स और सेंट्रल बैंकों के मेटल को देखने के तरीके को बदल रहे हैं। अपनी लेटेस्ट प्रेशियस मेटल्स क्वार्टरली रिपोर्ट में मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ का कहना है कि 2026 की शुरुआत में $5,000 प्रति औंस से ज्यादा सोने की तेजी साइक्लिकल मोमेंटम (cyclical momentum) से कहीं ज़्यादा दिखाती है। यह मॉनेटरी कॉन्फिडेंस, रिज़र्व मैनेजमेंट और फिजिकल सप्लाई डायनामिक्स में एक बड़े रीसेट का संकेत देता है।

ट्रेडिशनल रेट लॉजिक से अलग

सोना ऐतिहासिक रूप से रियल इंटरेस्ट रेट्स के उलटा चलता है। फिर भी 2023 और 2025 के बीच रियल रेट्स पॉजिटिव रहने के बावजूद कीमतें बढ़ीं। रिपोर्ट का कहना है कि रिकॉर्ड सॉवरेन डेट और बढ़ते फिस्कल प्रेशर के बीच मार्केट अब उन रियल रिटर्न्स के ड्यूरेबिलिटी पर सवाल उठा रहे हैं।

फर्म के कमोडिटीज़ एनालिस्ट मानव मोदी का कहना है कि इन्वेस्टर्स रियल यील्ड्स को पॉलिसी-ड्रिवन और टेम्पररी मानते हैं। यह सोच सोना रखने की अपॉर्चुनिटी कॉस्ट को कम करती है और सिर्फ़ शॉर्ट-टर्म महंगाई के बजाय सिस्टमैटिक रिस्क के खिलाफ बचाव के तौर पर इसकी अपील को मज़बूत करती है।

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