Gold-Silver Prices: क्यों गिरे सोने-चांदी के भाव? एक्सपर्ट्स ने बताई असली वजह, क्या यह है निवेश का सही वक्त?

Gold-Silver Prices: सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार 9 जनवरी को गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और सुरक्षित निवेश की मांग में आई थोड़ी कमी के चलते घरेलू सर्राफा बाजार में दबाव दिखा। बाजार आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सोना करीब ₹1.37 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं चांदी की कीमत लगभग ₹2.42 लाख प्रति किलो पर रही

अपडेटेड Jan 09, 2026 पर 10:58 AM
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Gold-Silver Prices: चांदी 2025 की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कमोडिटी रही

Gold-Silver Prices: सोने और चांदी की कीमतों में शुक्रवार 9 जनवरी को गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और सुरक्षित निवेश की मांग में आई थोड़ी कमी के चलते घरेलू सर्राफा बाजार में दबाव दिखा। हालांकि सोने के मुकाबले, चांदी में हल्की गिरावट देखने को मिली। बाजार आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सोना करीब ₹1.37 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता नजर आया। वहीं चांदी की कीमत लगभग ₹2.42 लाख प्रति किलोग्राम पर रही।

हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह कमजोरी किसी बड़े ट्रेंड रिवर्सल का संकेत नहीं है, बल्कि हालिया तेजी के बाद आया एक अस्थायी ठहराव है।

आज कीमतों पर दबाव क्यों दिखा?

कमोडिटी बाजार के जानकारों के मुताबिक, सोने में आज की गिरावट के पीछे मुख्य वजह करेंसी मूवमेंट और ग्लोबल संकेत रहे। डॉलर के मजबूत होने से इमर्जिंग मार्केट्स में सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कोई बड़ा नया ट्रिगर न मिलने से निवेशक सतर्क दिखे।


LKP सिक्योरिटीज के वीपी–रिसर्च (कमोडिटी और करेंसी) जतिन त्रिवेदी के अनुसार, MCX पर सोना कमजोर हुआ, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तुलनात्मक रुप से स्थिर रहीं। रुपये में उतार-चढ़ाव ने घरेलू बाजार में बुलियन पर दबाव बढ़ाया। उन्होंने बताया कि आने वाला सप्ताह भी उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है, क्योंकि अमेरिका से जुड़े अहम आंकड़े जैसे ADP रोजगार डेटा और नॉन-फार्म पेरोल्स आने वाले हैं, जो ब्याज दरों और डॉलर की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।

त्रिवेदी का मानना है कि निकट भविष्य में सोना ₹1.35 लाख से ₹1.38 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में कारोबार कर सकता है।

चांदी की मजबूती क्यों बरकरार है?

जहां सोना थोड़ी कमजोरी दिखा रहा है, वहीं चांदी का आधार अब भी मजबूत माना जा रहा है। टाटा म्यूचुअल फंड की जनवरी 2026 की आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी 2025 की सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कमोडिटी रही, जिसने पिछले एक साल में करीब 161 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।

रिपोर्ट में इस तेजी के पीछे सप्लाई के मोर्चे पर लगातार बनी कमी, मजबूत इंडस्ट्रियल मांग और निवेशकों की दोबारा बढ़ती दिलचस्पी को प्रमुख कारण बताया गया है। इसके अलावा माइनिंग सप्लाई में कमी, चीन की सख्त एक्सपोर्ट पॉलिसी, कई सालों के निचले स्तर पर मौजूद इन्वेंट्री और ETF में बढ़ते निवेश ने भी चांदी की लंबी अवधि की तस्वीर को सहारा दिया है।

मीडियम से लॉन्ग टर्म आउटलुक क्या कहता है?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि शॉर्ट-टर्म गिरावट के बावजूद कीमती धातुओं का लॉन्ग-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। रिद्धिसिद्धि बुलियंस के मैनेजिंग डायरेक्टर और इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पृथ्वीराज कोठारी के अनुसार, सोना और चांदी दोनों ही स्ट्रक्चलर रूप से मजबूत स्थिति में हैं।

उनका कहना है कि सोना, इनवेस्टमेंट पोर्टफोलियो में स्थिरता बनाए रखने का काम करता रहेगा। जबकि चांदी अपने तेज उतार-चढ़ाव के कारण ज्यादा रिटर्न की संभावना देती है। तेज रैली के बाद बीच-बीच में कंसोलिडेशन स्वाभाविक है, लेकिन इससे ट्रेंड नहीं बदलता।

कोठारी के मुताबिक, अगले एक साल में सोना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर $5,000–5,500 प्रति औंस के स्तर तक जा सकता है। भारत में इसका भाव ₹1.50 से 1.65 लाख प्रति 10 ग्राम तक रह सकता है। सोने के दाम को ब्याज दरों में कटौती और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी से सपोर्ट मिल सकती है।

वहीं चांदी के दाम का $95 से 100 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान है और भारत में इसकी कीमतें ₹3.00–3.25 लाख प्रति 10 ग्राम तक जा सकती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस दौरान चांदी के दाम में 10 से 15 प्रतिशत का शॉर्ट-टर्म करेक्शन पूरी तरह संभव हैं और इन्हें हेल्टी मार्केट करेक्शन के तौर पर देखा जाना चाहिए।

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