gold exchange in India : सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया ने कहा कि सरकार ने सिक्योरिटीज के रूप में इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (ईजीआर) और सेबी (वॉल्ट मैनेजर्स) रेग्युलेशंस, 2021 को नोटिफाइड कर दिया है, जिससे भारत में गोल्ड एक्सचेंज (gold exchange) के परिचालन का रास्ता साफ हो गया है। एक ईजीआर का मतलब फिजिकल गोल्ड के डिपॉजिट के आधार पर एक इलेक्ट्रॉनिक रिसीट जारी करने से है। मार्केट रेग्युलेटर ने भी गोल्ड एक्सचेंज का फ्रेमवर्क जारी कर दिया है।
गोल्ड एक्सचेंज ईजीआर खरीदने-बेचने का राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म होगा
सेबी के फ्रेमवर्क के मुताबिक, गोल्ड एक्सचेंज ईजीआर खरीदने और बेचने के लिए एक राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म होगा। फिजिकल गोल्ड के एवज में ईजीआर जारी किया जाएगा। सेबी के अनुसार, इनवेस्टर्स मौजूदा स्टॉक एक्सचेंजों के साथ-साथ प्रस्तावित गोल्ड एक्सचेंज पर ईजीआर में ट्रेडिंग कर सकते हैं।
तीन चरणों में होगा ट्रांजैक्शन
सर्कुलर के मुताबिक, गोल्ड एक्सचेंज में पूरे ट्रांजैक्शन को तीन चरणों में बांटा गया है- फिजिकल गोल्ड को ईजीआर में बदलना, स्टॉक एक्सचेंज पर ईजीआर की ट्रेडिंग और ईजीआर को फिजिकल गोल्ड में बदलना। गोल्ड एक्सचेंज के पूरे इकोसिस्टम को सेबी द्वारा रेगुलेट किया जाएगा, जो गोल्ड एक्सचेंज के लिए एकमात्र रेगुलेटर होगा। इसमें वॉल्टिंग, एसेइंग, गोल्ड क्वालिटी और डिलिवरी स्टैंडर्ड शामिल हैं। इस बीच स्टॉक एक्सचेंजेस को ट्रेडिंग और/या ईजीआर को सोने में बदलने के लिए विभिन्न डिनोमिनेशंस के साथ कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च शुरू करने की अनुमति दी गई है।
इनवेस्टर्स कहीं से भी निकाल सकेंगे जमा सोना
फ्रेमवर्क के तहत, एक ईजीआर को फिजिकल गोल्ड के एक यूनीक बार रिफरेंस नंबर से लिंक नहीं किया जाएगा। इनवेस्टर्स की सुविधा के लिए सेबी ने एक स्थान पर जमा किए गए सोने को उसी या दूसरे वॉल्ट मैनेजर्स से निकाले जाने के आदेश जारी करेगा। सेबी ने सर्कुलर में कहा, ये प्रोविजन डिपॉजिटरी को बायर के पसंदीदा वॉल्ट लोकेशन से फिजिकल गोल्ड की निकासी की सुविधा प्रदान करेगा। एक्सपर्ट्स के अनुसार, मौजूदा फॉर्मेट में, मान्यता प्राप्त वॉल्टिंग लूप के बाहर सोने का लेन-देन सभी द्विपक्षीय समझौतों और भरोसे पर आधारित है।
गोल्ड ज्वैलरी मैन्युफैक्चरर्स और रिटेलर्स के लिए भी फायदेमंद
आईआईएम अहमदाबाद में इंडिया गोल्ड पॉलिसी सेंटर के हेड सुधीश नांबियाथ ने कहा, “गोल्ड ज्वैलरी मैन्युफैक्चरर्स और रिटेलर्स के लिए, अपनी इन्वेंट्री जरूरतों के प्रबंधन का सबसे कुशल तरीका बनने जा रहा है। इससे डिलिवरी की कैंसिलेशन जैसे काउंटर पार्टी रिस्क से जुड़े जोखिम खत्म हो जाएंगे, एक्सचेंज प्लेटफॉर्म के जरिये पारदर्शी प्राइसिंग, स्टैंडर्ड बार्स तक पहुंच सुनिश्चित होगी।”