Gold Price : कोमेक्स पर शुरुआती कारोबार में सोने की कीमत 1.07 फीसदी बढ़कर 4,620.10 डॉलर प्रति औंस हो गई। यह 14 मई, 2026 के बाद का इसका सबसे ऊंचा स्तर है। इस दिन सोनें की कीमतें 4,659 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गईं थीं। इंटरनेशनल बाजारों की तरह ही घरेलू बाजार में भी MCX पर अक्टूबर कॉन्ट्रैक्ट का गोल्ड वायदा 0.85 फीसदी बढ़कर 1,60,784 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है।
21 अगस्त के जारी ऑगमॉन्ट बुलियन (Augmont Bullion) की रिपोर्ट में बताया गया है कि इस हफ्ते प्रेशियस मेटल्स की कीमतों में 5 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। US ट्रेज़री डिपार्टमेंट ने उधार लेने की लागत को कम करने के लिए अपने लॉन्ग-टर्म डेट बायबैक को कम से कम दोगुना करने की योजना का ऐलान किया है, जिससे ट्रेज़री यील्ड और डॉलर में तेज गिरावट आई है। इससे सोने की चमक बढ़ गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने ने अपनी 4,340–4,440 डॉलर (₹1,53,000-₹1,56,000) की रेंज को तोड़कर 4,500 डॉलर (₹1,58,500) का टारगेट हासिल कर लिया है और अब इसका अगला टारगेट 4,600 डॉलर (₹1,62,000) है।
सोने को कहां से मिल रहा ईंधन?
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी का कहना है कि सोने की कीमतें 2.5 महीने से ज्यादा समय के हाई के आस-पास ट्रेड कर रही है। निवेशकों ने कम बॉन्ड यील्ड से मिलने वाले सपोर्ट और महंगाई और बढ़ते फिस्कल रिस्क को लेकर फिर से पैदा हुई चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है, जिसका असर सोने पर देखने को मिल रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि यह राहत कुछ समय के लिए ही रही। अमेरिका में कुल फ़ेडरल कर्ज के 40 लाख करोड़ डॉलर से ज्यादा हो जाने के बाद,अमेरिकी सरकार की आर्थिक स्थिति के टिकाऊपन को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ गईं,जिससे 30-साल के ट्रेज़री यील्ड में फिर से उछाल आया। लगातार होते राजकोषीय घाटे और बढ़ती ब्याज लागतों ने करेंसी की वैल्यू घटने और सॉवरेन डेट रिस्क (सरकारी कर्ज़ से जुड़े जोखिम) से बचाव के तौर पर सोने की अहमियत को और बढ़ा दिया है।
अब कहां होनी चाहिए निवेशकों की नजर?
आगे आने वाले दिनों में सोने का चाल पर कुछ बातों का खास असर होगा। हमें इन पर नजर रखनी चाहिए। इनमें से पहली है फेडरल रिज़र्व का ब्याज दरों से जुड़ा फैसला। निवेशकों को ब्याज दरों अनुमानों में होने वाले बदलावों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए,क्योंकि सोने की कीमतें मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) के नजरिए से काफी प्रभावित होती हैं। इसके अलावा US डॉलर और ट्रेजरी यील्ड की चाल की असर भी सोने के भाव पर पड़ता है। इनमें कमजोरी आने से सोने-चांदी) को और सपोर्ट मिल सकता है,जबकि इनमें उछाल आने पर सोने-चांदी में प्रॉफिट-बुकिंग हो सकती है।
गोल्ड निवेशकों को भू-राजनीतिक घटनाओं पर भी नजर रखनी चाहिए। मिडिल ईस्ट से कोई अच्छी खबर आने पर तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है इससे महंगाई का जोखिम कम हो सकता है। ऐसे में बॉन्ड यील्ड घटने से सोने को सपोर्ट मिल सकता है। हालांकि,रिस्क सेंटीमेंट में सुधार होने से सुरक्षित निवेश(सेफ-हेवन) विकल्प के तौर पर सोने की चमक फीकी पड़ सकती है।
VT मार्केट्स के रुचित ठाकुर का कहना है कि निवेशकों के लिए महंगे भाव पर रैली के पीछे भागना जोखिम भरा हो सकता है। जिनके पास पहले से सोने की होल्डिंग है वे इसमें बने रह सकते हैं। जबकि नए निवेशकों को सलाह होगी कि वे इस तेज उछाल के बाद आक्रामक खरीदारी करने से बचें और किसी गिरावट में धीरे-धीरे किस्तों में खरीदारी करने की रणनीत अपनाएं।
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