तेल की कीमतों के लिए जोखिम उच्च ही बने हुए हैं। फिर बात चाहे निकट भविष्य की हो या फिर साल 2027 तक की। यह बात गोल्डमैन सैक्स ने कही है। रॉयटर्स के मुताबिक, दिग्गज इनवेस्टमेंट बैंक ने आगे कहा कि कच्चे तेल की सप्लाई में लगे पिछले बड़े झटकों का लगातार बने रहना इस संभावना को दिखाता है कि तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रह सकती हैं।
गुरुवार को बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 119 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चढ़ गई। ऐसा तब हुआ, जब ईरान ने अपने साउथ पार्स गैस फील्ड पर इजरायल के हमले के जवाब में पूरे मध्य पूर्व में एनर्जी फैसिलिटीज पर हमला किया। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग अब अपने तीसरे सप्ताह में पहुंच चुकी है। यह 28 फरवरी को शुरू हुई थी। इस युद्ध के कारण खाड़ी देशों में बड़े पैमाने पर तेल और गैस उत्पादन बंद हो गया है।
अप्रैल से धीरे-धीरे सुधर सकती है सप्लाई
गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि बेस केस में उसका अनुमान है कि अप्रैल से कच्चे तेल की सप्लाई में धीरे-धीरे सुधार होगा। 2026 की चौथी तिमाही तक ब्रेंट की कीमतें 70 डॉलर के स्तर पर आ जाएंगी। लेकिन यह चेतावनी भी दी कि ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने को लेकर अनिश्चितता के कारण लंबी अवधि के आउटलुक के लिए जोखिम ऊंचे बने हुए हैं। गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि अगर उत्पादन क्षमता को नुकसान पहुंचता है, तो सप्लाई लंबे समय तक सीमित रह सकती है। हालांकि, अगर सप्लाई फिर से शुरू होने पर OPEC (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ द पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज) अपनी अतिरिक्त क्षमता का इस्तेमाल करता है, तो उत्पादन बढ़ सकता है।
बैंक के बेस केस अनुमान के अनुसार, अगर सब कुछ पूरी तरह से फिर से शुरू हो जाता है तो 4 सप्ताह के अंदर तेल का उत्पादन सामान्य हो जाएगा। लेकिन बैंक ने यह भी चेतावनी दी कि लंबी अवधि में सप्लाई कम होने का बड़ा खतरा बना हुआ है, खासकर ईरान और ऑफशोर में होने वाले उत्पादन से।
कीमतें नीचे आने के लिए होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई सामान्य होना जरूरी
गोल्डमैन सैक्स ने कहा कि जब तक होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई सीमित बनी रहेगी, तब तक निकट भविष्य में तेल की कीमतें बढ़ते रहने की संभावना है। यह भी कहा कि अगर व्यवधान बना रहता है, तो ब्रेंट की कीमतें 2008 के अपने उच्चतम स्तर को भी पार कर सकती हैं। अमेरिका द्वारा निर्यात पर प्रतिबंध लगाए जाने के जोखिमों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी से ब्रेंट-WTI के बीच कीमतों का अंतर और भी बढ़ सकता है।