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ऊंझा: देश की सबसे बड़ी जीरा मंडी में कैसे किसानों को उचित दाम दिलाने में मदद कर रहा है NCDEX

गुजरात के ऊंझा में देश की सबसे बड़ी जीरा मंडी है और NCDEX यहां किसानों व ट्रेडर्स को जीरे की सही कीमत दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 19, 2022 पर 12:09 PM
ऊंझा: देश की सबसे बड़ी जीरा मंडी में कैसे किसानों को उचित दाम दिलाने में मदद कर रहा है NCDEX
NCDEX ने 2005 में जीरा का फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च किया था

अहमदाबाद से मेहसाणा की तरफ करीब 100 किलोमीटर तक जाने के बाद, जब आपको हवा में चारों तरफ जीरे की खुशबू आने लगे, तो इसका मतलब है कि आप ऊंझा पहुंच गए हैं। ऊंझा में देश की सबसे बड़ी मसाला और जीरा मंडी (Unjha Mandi) है। मसालों की सबसे बड़ी मंडी होने के नाते ऊंझा को भारत का "स्पाइस सिटी" भी कहा जाता है। ऊंझा मंडी में प्रवेश करते ही आपको चारों तरफ जीरे और दूसरे मसालों के ढेर लगे दिखेंगे। करीब 300 किलोमीटर दूर से किसान यहां अपनी फसलों को लेकर आते हैं।

किसानों के इतने दूर से ऊंझा मंडी में आने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि यहां उन्हें न सिर्फ अपनी फसलों के खरीदार मिलते हैं, बल्कि उन्हें अपनी फसल का उचित दाम भी मिलता है। किसानों की फसल की उनकी सामने ही नीलामी होती है। नीलामी में सबसे अधिक बोली लगने के बाद किसान को पूछा जाता है कि क्या वह इस कीमत पर अपनी फसल बेचने को राजी है? अगर किसान हां बोलता है, तभी नीलामी पूरी होती है और किसान को उसी दिन उसके फसल का पैसा उसके हाथ में मिल जाता है।

किसानों को देश के सबसे बड़े जीरा केंद्र- ऊंझा में उनकी फसल का उचित दाम दिलाने में सबसे मुख्य भूमिका नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज लिमिटेड (NCDEX) की है। NCDEX की मदद से ही किसान यह फैसला कर पातें है कि उनकी फसल का सही दाम क्या है और उन्हें किस कीमत पर अपनी फसल को बेचने पर हामी भरनी है। साथ ही व्यापारी भी NCDEX के जरिए यह तय करते हैं कि वह फसल के लिए कितने रुपये तक की बोली लगा सकते हैं।

NCDEX देश की सबसे बड़ी एग्री-कमोडिटी एक्सचेंज है। ऊंझा मंडी में जीरे के व्यापार के तरीके को बदलने और इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाने में NCDEX की भूमिका सबसे अहम है। NCDEX के प्लेटफॉर्म पर जीरे की फ्यूचर ट्रेडिंग से इसकी कीमतों को लेकर एक संकेत मिलता है, जिसे जीरे के व्यापार में शामिल किसान से लेकर प्रोसेसर्स तक सभी बेंचमार्क के तौर पर लेते हैं। इसी बेंचमार्क कीमत के आधार पर किसान मंडी में अपनी फसल को लेकर सौदेबाजी करते हैं और अपनी फसल का सही दाम पाते हैं।

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