अगर ईरान में लड़ाई जारी रहती है तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। अगर ऐसा हुआ तो सभी गल्फ एनर्जी प्रोड्यूसर कुछ हफ्तों में एक्सपोर्ट बंद कर देंगे। यह बात कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने फाइनेंशियल टाइम्स को एक इंटरव्यू में कही है। कतर ने इस सप्ताह सोमवार को लिक्विफाइड नेचुरल गैस का प्रोडक्शन रोक दिया। इसकी वजह है कि ईरान, इजरायली और अमेरिकी हमलों के जवाब में गल्फ देशों को भी निशाना बना रहा है। ईरान ने मध्यपूर्व के कई देशों में अमेरिकी मिलिट्री बेस और इजरायल से जुड़े एसेट्स को निशाना बनाकर हमले किए हैं।
कतर का LNG प्रोडक्शन, ग्लोबल सप्लाई में लगभग 20% का योगदान देता है। यह एशियन और यूरोपियन दोनों मार्केट में फ्यूल की डिमांड को बैलेंस करने में एक बड़ी भूमिका निभाता है। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 92.69 डॉलर प्रति बैरल और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत बढ़कर 90.90 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, काबी का कहना है, "जिन लोगों ने अभी तक फोर्स मेज्योर की मांग नहीं की है, हमें उम्मीद है कि वे अगले कुछ दिनों में ऐसा करेंगे, तब तक के लिए जब तक कि युद्ध जारी रहेगा। गल्फ रीजन के सभी एक्सपोर्टर्स को फोर्स मेज्योर की मांग करनी होगी।" उन्होंने कहा, "अगर यह लड़ाई कुछ हफ्तों तक जारी रहती है, तो दुनिया भर में GDP ग्रोथ पर असर पड़ेगा।"
सबकी एनर्जी की कीमतें बढ़ने वाली हैं
काबी ने कहा कि सबकी एनर्जी की कीमतें बढ़ने वाली हैं। कुछ प्रोडक्ट्स की कमी होगी और फैक्ट्रियां सप्लाई नहीं कर पाएंगी। अगर युद्ध तुरंत खत्म भी हो जाता है, तो भी कतर को डिलीवरी के नॉर्मल साइकिल पर लौटने में हफ्तों से महीनों तक का समय लगेगा। काबी कतरएनर्जी के CEO भी हैं। यह कंपनी दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस प्रोड्यूसर में से एक है। काबी ने अनुमान जताया है कि अगर जहाज और टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर पाए, तो दो से तीन हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। वहीं गैस की कीमतें बढ़कर 40 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट हो जाएंगी। इस बीच बार्कलेज ने अनुमान जताया है कि अगर मिडिल ईस्ट में छाया संकट कुछ और हफ्तों तक जारी रहा तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक अत्यंत संकरा और रणनीतिक समुद्री मार्ग है। यह ईरान और ओमान/यूएई के बीच स्थित है। दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 40% मिडिल ईस्ट से इंपोर्ट करता है। इस सप्लाई का ज्यादातर हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है।