Indian Rupee: RBI के दखल के बावजूद भी क्यों गिर रहा रुपया, 91.71 के निकला पार, आखिर क्या है वजह

Indian Rupee: अभिषेक गोयनका ने कहा कि यूएस के साथ ट्रेड डील न होने से बाजार में चिंता बनी है। डील ना होने के कारण एक्सपोर्टर्स में काफी चिंता है और यह डॉलर को बेच नहीं रहे। बाजार में डॉलर की मांग है लेकिन सप्लाई ना होने से दबाव बढ़ रहा है

अपडेटेड Jan 21, 2026 पर 2:46 PM
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बाजार की नजर आज रुपये पर भी है जिसमें गिरावट का सिलसिला थमने का का नाम नहीं ले रहा है।

Indian Rupee: बाजार की नजर आज रुपये पर भी है जिसमें गिरावट का सिलसिला थमने का का नाम नहीं ले रहा है। आज फिर रुपये ने 91.76 प्रति DOLLAR का नया निचला स्तर छुआ। FIIs की इक्विटी में भारी बिकवाली और डॉलर की जोरदार डिमांड से दबाव बना । लेकिन RBI के दखल के बावजूद रुपये में गिरावट बढ़ी है।

रुपये में नए निचले स्तर

FIIs की इक्विटी में भारी बिकवाली और डॉलर में खरीद से बना दबाव बढ़ रहा है। RBI डॉलर सप्लाई तो कर रहा है लेकिन बड़ी मात्रा में नहीं। दूसरे इमर्जिंग देशों की करेंसी में स्थिरता के बावजूद रुपया टूट रहा है। 2026 में भारतीय बाजार 4.5% टूटा जबकि कोरियाई इंडेक्स 15% ऊपर है। बाजार में सेंटिमेंट काफी खराब हुआ है।


फॉरेक्स ट्रेडर्स ने कहा कि ग्रीनलैंड मुद्दे पर यूरोप के साथ बढ़ते तनाव और संभावित टैरिफ की वजह से इन्वेस्टर्स ने सावधानी भरा रुख अपनाया है।

“डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड की धमकियां उस स्थापित ग्लोबल ऑर्डर को हिला रही हैं जिसने पिछले कई दशकों में बड़ी अर्थव्यवस्थाओं/सहयोगियों के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग को सहारा दिया है।

IFA ग्लोबल ने एक रिसर्च नोट में कहा, “किसी भी खास डेटा पॉइंट की तुलना में जियोपॉलिटिक्स का एसेट प्राइस मूवमेंट पर कहीं ज़्यादा असर पड़ रहा है।”

रुपये में गिरावट क्यों?

ग्रीनलैंड को लेकर US-यूरोप में तनाव बढ़ने से रुपये में गिरावट आई है। वहीं भारत-US ट्रेड डील में हो रही देरी ने भी इसपर दबाव बनाया है। इस बीच एक्सपोर्टर्स की तरफ से डॉलर की भारी डिमांड देखने को मिल रही है। इक्विटी में गिरावट से FIIs डिमांड बढ़ी है। यहीं कारण है कि रुपये में गिरावट बढ़ी है। साथ ही रुपया ने अपने 91/$ के अहम टेक्निकल लेवल को भी तोड़ दिया है।

IFA ग्लोबल और बिलियनज के फाउंडर & CEO अभिषेक गोयनका ने कहा कि यूएस के साथ ट्रेड डील न होने से बाजार में चिंता बनी है। डील ना होने के कारण एक्सपोर्टर्स में काफी चिंता है और यह डॉलर को बेच नहीं रहे। बाजार में डॉलर की मांग है लेकिन सप्लाई ना होने से दबाव बढ़ रहा है । दूसरे करेंसी के मुकाबले डॉलर में गिरावट है।

उन्होंने आगे कहा कि रुपये में बाजार की गिरावट का दोहरा दबाव पड़ रहा है। आरबीआई एक्टिव है और वह बाजार की हालात पर नजर बनाए हुए है। आरबीआई रुपये को लगातार संभालने की कोशिश भी कर रहा है। अभिषेक गोयनका ने आगे कहा कि 3-4 फीसदी रुपया अंडरवैल्यूड है।

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