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पर्यावरण संरक्षण से लेकर रोजगार बढ़ाने में मददगार बन रहा भारत का जूट उद्योग, केंद्र सरकार के पैसे बचाने का कपड़ा मंत्रालय का मेगा मिशन

कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह की सोच यही है कि अरसे से ICU में पड़े जूट उद्योग के दिन बदले ताकि आमदनी भी पूरी हो और बचत भी ऐसी हो कि पूरी सरकार के सामने एक मिसाल बन सके

Amitabh Sinhaअपडेटेड Nov 28, 2024 पर 7:40 PM
पर्यावरण संरक्षण से लेकर रोजगार बढ़ाने में मददगार बन रहा भारत का जूट उद्योग, केंद्र सरकार के पैसे बचाने का कपड़ा मंत्रालय का मेगा मिशन
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने बताया कि अब जूट को बांस और रिसाइकिल कॉटन फाइबर के साथ ब्लेंड कर के एक नया ग्रीन फाइबर तैयार किया जा रहा है

भारत का जूट क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आजादी के बाद जूट बैग्स की मांग कम होने के बाद बंगाल से लेकर कई राज्यों में इससे जुड़े उद्योग धंधे चौपट होने लगे थे। लेकिन अब स्थितियां बदल रहीं है। JPM एक्ट, 1987 के तहत केन्द्र सरकार ने खाद्यान्न और चीनी को जूट बैग्स में पैक करना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद सरकार हर साल जूट मिलों से 12,000 करोड़ रूपये के जूट बैग्स खरीदती है। 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार आने के बाद तो प्लास्टिक मुक्त भारत का संकल्प लिया गया तो जूट उध्योग में तेजी आती दिखायी देने लगी। अब केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के नेतृत्व मे कपड़ा मंत्रालय जूट की ब्लेंडिंग और रिसाईकल्ड फाईबर से सरकार के खर्च में बड़े बचत का मेगा प्लान बनाया है।

भारत में अभी 13 मिलियन टन का रॉ फाइबर उपलब्ध है, लेकिन भविष्य में इसे 20 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य है । 2023-24 में खेती का क्षेत्र 6.7 लाख हेक्टेयर था. इसमें जूट का कुल उत्पादन 17.3 लाख टन (96 लाख गांठें) रहीं। देश मे कुल 113 जूट मिलें हैं। इन 113 में से 89 मिलें मौजुद में काम कर रहीं हैं। घरेलू बाजार में जूट की खपत 11.2 लाख टन, निर्यात 1.6 लाख टन और निर्यात मूल्य 2804 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। जहां तक रोजगार के अवसरों का सवाल है, कपड़ा मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि इस जूट उध्योग से रोजगार के अवसर खासे बढ़े हैं। इससे 40 लाख किसान और 7 लाख मजदूरों (4 लाख डायरेक्ट और 3 लाख इनडायरेक्ट) को सीधी कमाई का जरिया मिल चुका है।

जूट और बैम्बू के साथ बलेंड करके फाईबर तैयार करने की मुहिम भी चालू हो चुकी है। इस संदर्भ में, अब जूट को बांस और रिसाइकिल कॉटन फाइबर के साथ ब्लेंड कर के एक नया ग्रीन फाइबर तैयार किया जा रहा है। जिससे जल्द ही सस्टेनेबल और ग्रीन मेनवियर डेवलप किया जाएगा। CRIJAF कोलकाता ने जूट बायोमास से बायो एथनॉल और बायो CNG का विकास किया है, जो आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा संकट को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और किसानों और उद्योगों के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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