भारत का जूट क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आजादी के बाद जूट बैग्स की मांग कम होने के बाद बंगाल से लेकर कई राज्यों में इससे जुड़े उद्योग धंधे चौपट होने लगे थे। लेकिन अब स्थितियां बदल रहीं है। JPM एक्ट, 1987 के तहत केन्द्र सरकार ने खाद्यान्न और चीनी को जूट बैग्स में पैक करना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद सरकार हर साल जूट मिलों से 12,000 करोड़ रूपये के जूट बैग्स खरीदती है। 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार आने के बाद तो प्लास्टिक मुक्त भारत का संकल्प लिया गया तो जूट उध्योग में तेजी आती दिखायी देने लगी। अब केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के नेतृत्व मे कपड़ा मंत्रालय जूट की ब्लेंडिंग और रिसाईकल्ड फाईबर से सरकार के खर्च में बड़े बचत का मेगा प्लान बनाया है।
