Makhana Prices Surge: देश में मखानों की मांग बढ़ी है। बढ़ती मांग से कीमतों में उछाल आया है। मखानों के दाम 1 साल में दो गुने हुए। जबकि 6 सालों में दाम 150% से ज्यादा चढ़े । माखानों की खेती 15000 हेक्टेयर में खेती होती है। वहीं 1.20 लाख मीट्रिक टन सालाना उत्पादन है। US, UK, सिंगापुर में भी मखानों की मांग बढ़ी है। श्रीलंका, साउथ अफ्रीका में भी मांग बढ़ी।
देश में मखाने की कीमतों पर नजर डालें तो साल 2021-22 में मखानों के दाम 400-1000 रुपये प्रति किलोग्राम पर थे जबकि 2023-24 में इसकी कीमत 1200 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। वहीं साल 2024-25 में मखानों की कीमत 1000-4000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई है।
बता दें कि विश्व का करीब 90 फीसदी मखाने का उत्पादन भारत में ही होता है। इसमें भी करीब 80 फीसदी मखाना उत्पादन उत्तरी बिहार में होता है। मखाने के खेती के लिए जलमग्न भूमि की आवश्यकता होती है। सर्दी यानि कि नवंबर में इसकी नर्सरी डाली जाती है और 3 से 4 महीने बीत जाने के बाद इसकी रोपाई की जाती है। मखाने की खेती के लिए 4 से 5 फीट तक पानी भरा रहना चाहिए, इसलिए इसकी खेती अक्सर तालाब में की जाती है।
राजगोर स्पाइसेस के आशीष राजगोर का कहना है कि मखाने के प्रोसेसिंग शुरु हो गई है। 15 अप्रैल से मखाने की नई सप्लाई आने शुरु हो जाएगी। देश का 30 फीसदी मखाना विदेशों में एक्सपोर्ट होता है जबकि 70 फीसदी निजी खपत है। बोर्ड बनने से मखानों का उत्पादन बढ़ने की
मखाने के एक्सपोर्ट में आने वाले दिनों में तेजी की उम्मीद बनी हुई है । क्योंकि मखाने की न्यूट्रिशन वैल्यू को लेकर लोगों के बीच जागरुकता बढ़ी है। यह एक रियल वैगेन है इसके अंदर मिलावट नहीं है।
उन्होंने कहा कि मांग बढ़ने से मखाने की कीमतों में तेजी आई है। मखाने का होलसेल में भाव 1000-2000 रुपये प्रति किलो के बीच है। मखाने की कीमतों में और ज्यादा तेजी की उम्मीद कम है।
(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।