गोल्ड इंपोर्ट में बढ़ोतरी की यह वजह मान रहे बाजार एक्सपर्ट, क्या आप भी है इससे सहमत

भारत में इन्वेस्टमेंट डिमांड जो लगभग 27-28% थी, अब 45% से ज़्यादा है और बढ़ती अनिश्चितता ने इन्वेस्टर को सोने और चांदी की ओर पोर्टफोलियो को रीएलोकेट करने के लिए प्रेरित किया है

अपडेटेड Feb 17, 2026 पर 5:28 PM
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मेहता ने कहा, “गोल्ड ETF और सिल्वर ETF में बहुत पैसा आ रहा है,” जिससे पता चलता है कि इन्वेस्टर सोने को कंजम्प्शन प्रोडक्ट के बजाय इन्वेस्टमेंट के तौर पर ज़्यादा खरीद रहे हैं।

Gold Price: भारत में सोने-चांदी के इंपोर्ट में तेज बढ़ोतरी की वजह ज्वेलरी डिमांड नहीं बल्कि इन्वेस्टमेंट डिमांड के कारण आई है। यह कहना है कि इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता का। सीएनबीसी-टीवी 18 से बातचीत के दौरान उनका कहना है कि भारत में सोने और चांदी के इंपोर्ट में तेज बढ़ोतरी घरेलू बचत के व्यवहार में गहरे बदलाव को दिखाती है, जिसमें इन्वेस्टर कीमती धातुओं को सिर्फ़ ज्वेलरी के बजाय एक फाइनेंशियल एसेट के तौर पर देख रहे हैं।

सुरेंद्र मेहता ने आगे कहा कि लोग दूसरे एसेट क्लास से सोने की ओर जा रहे हैं, जिसे अब असल में एक सेफ़ हेवन एसेट कहा जाता है। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में डिमांड का नेचर काफी बदल गया है। "भारत में इन्वेस्टमेंट डिमांड, जो लगभग 27-28% थी, अब 45% से ज़्यादा है," और बढ़ती अनिश्चितता ने इन्वेस्टर को सोने और चांदी की ओर पोर्टफोलियो को रीएलोकेट करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने आगे कहा कि इतना ही नहीं पोर्टफोलियो में बदलाव के अलावा नया पैसा भी मार्केट में आ रहा है।

यह ट्रेंड फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में भी दिख रहा है, जिसमें एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स में भागीदारी बढ़ी है। मेहता ने कहा, “गोल्ड ETF और सिल्वर ETF में बहुत पैसा आ रहा है,” जिससे पता चलता है कि इन्वेस्टर सोने को कंजम्प्शन प्रोडक्ट के बजाय इन्वेस्टमेंट के तौर पर ज़्यादा खरीद रहे हैं।इस वजह से ज्वेलरी कंजम्प्शन इंपोर्ट में बढ़ोतरी की वजह नहीं बन रहा है।


उन्होंने आगे कहा, “ऑर्गनाइज्ड और अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर में ज्वेलरी की बिक्री कम हुई है, लेकिन इन्वेस्टमेंट डिमांड ज़्यादा है, जो कंपोजिशन में बदलाव को बताया है।

मेहता को उम्मीद है कि सीज़नल फैक्टर्स की वजह से अगले कुछ महीनों में इंपोर्ट और डिमांड मज़बूत रहेगी। आने वाले फेस्टिवल और वेडिंग सीज़न की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, “हम फरवरी और मार्च के लिए पिछले साल से बेहतर नंबर देख सकते हैं।”

हालांकि उनका मानना है कि आगे ग्लोबल डेवलपमेंट्स से खरीदारी और तेज़ हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर हमें कोई जियोपॉलिटिकल बुरी खबर मिलती है तो सोने की कीमतें बढ़ जाएगी और इससे सोने की शुरुआती डिमांड बहुत बढ़ जाएगी।

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