Oil slumps : बाजार में मांग से जुड़ी चिंताओं के बीच दो सेशन में 9 फीसदी की गिरावट के बाद कच्चे तेल में तेजी देखने को मिल रही है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट फ्यूचर्स (West Texas Intermediate futures) मार्च के बाद सबसे बड़ी दो दिनी गिरावट के बाद बढ़कर 73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। चीन में कोविड-19 (Covid19 cases) के मामलों में बढ़ोतरी के बाद दुनिया में कमोडिटी के सबसे बड़े इम्पोर्टर देश की इकोनॉमी की वापसी की उम्मीदें घटने से आउटलुक कमजोर हो गया है। वर्ष की शुरुआत निराशानजक होने से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव दिख रहा है।
इनवेस्टर्स पिछले महीने फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की मीटिंग की कमेंट्री का सतर्कता से आकलन कर रहे हैं, जिसमें इकोनॉमी को बिना सुस्त किए महंगाई को नीचे लाने के संकल्प की पुष्टि की गई थी।
आईजी एशिया पीटीई में मार्केट स्ट्रैटजिस्ट जुन रोंग यीप (Jun Rong Yeap) ने कहा, वैश्विक मंदी की चेतावनी देने वाले संकेतों, कोविड-19 के मामले बढ़ने से चीन में सुस्त सुधार और सेंटीमेंट के बिगड़ने से तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है।
तेल के बाजार में मंदी के संकेत
बाजार से निकट भविष्य में तेल की पर्याप्त आपूर्ति के संकेत मिल रहे हैं। कुल मिलाकर तेल के बाजार में मंदी के संकेत हैं। खास बात यह है कि यूक्रेन युद्ध (war in Ukraine) के चलते रूसी क्रूड (Russian crude) पर बंदिशों के बावजूद ऐसे हालात हैं।
इंडस्ट्री से फंडेड अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (American Petroleum Institute) ने अमेरिकी कमर्शियल क्रूड का स्टॉक पिछले सप्ताह 33 लाख बैरल बढ़ने की खबर दी थी। वहीं, गैसोलीन की इन्वेंट्री भी बढ़ गई, लेकिन डिस्टिलेट्स (जिसमें डीजल भी शामिल है) की सप्लाई घट गई।