पाकिस्तान के रावलपिंडी-इस्लामाबाद इलाके में एक बड़ी क्राइसिस की खबर है। इस इलाके की करीब 40 फीसदी फ्लावर मिल्स (आटा चक्की) बंद हो चुकी हैं। इसकी वजह मिलों का बढ़ता नुकसान है। इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों का कहना है कि इसकी वजह सरकार की खराब पॉलिसी है। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में और आटा मिलें भी बंद हो सकती हैं। इसका मतलब है कि इस इलाके में आटे के लिए हाहाकार मच सकता है। इससे लोगों की रोटी भी संकट में पड़ सकती है।
आने वाले दिनों में गहरा संकता है संकट
Dawn की खबर के मुताबिक, पंजाब सरकार अगर गेहूं और आटा वितरण की व्यवस्था में बदलाव नहीं करती है तो आने वाले समय में संकट गहरा सकता है। अखबार के मुताबिक, पाकिस्तान फ्लावर मिल्स एसोसिएशन-पंजाब के पूर्व वाइस चेयरमैन चौधरी अफजल महमूद एडवोकेट ने इस बारे में पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज को बताया है। उन्होंने इस सेक्टर को संकट में धकेलने का आरोप अथॉरिटीज पर लगाया है।
प्रशासनिक हस्तक्षेप से बिगड़ रहे हालात
उन्होंने कहा है कि नियमों में लगातार बदलाव और प्रशासनिक हस्तक्षेप से हालात बिगड़ रहे हैं। उनका बयान व्हाट्सग्रुप के जरिए फ्लावर मिलर्स के बीच तेजी से सर्कुलेट हो रहा है। इसमें यह दावा किया गया है कि रावलपिंडी और इस्लामाबाद के मिलर्स को दक्षिण पंजाब के मुकाबले काफी नुकसान उठाना पड़ पड़ रहा है। इसकी वजह दक्षिण पंजाब में गेहूं उत्पादक जिलों को मिलने वाले खास फायदे हैं।
मिलों को जारी परमिट पर्याप्त नहीं
रावलपिंडी और इस्लामाबाद के मिल मालिकों को प्राइवेट सप्लायर्स से काफी ऊंची ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट पर गेहूं खरीदना पड़ता है। इससे उनकी लागत काफी बढ़ जाती है। इस वजह से मिलों को नुकसान हो रहा है। अथॉरिटीज मिलों को निश्चित कीमत पर आटा बेचने को मजबूर करती हैं। उनका यह भी कहना है कि मिलों को जो परमिट जारी किए गए है, वे पर्याप्त नहीं है। मिलों के बंद होने से बड़ी संख्या में बेरोजगारी फैलने का डर है।
एक समान पॉलिसी लागू करने की मांग
मिल मालिकों ने पंजाब सरकार से एक समान कीमत निर्धारण पॉलिसी लागू करने की अपील की है। उनका कहना है कि पूरे पंजाब में मिलों को समान रूप से गेहूं का वितरण होना चाहिए। साथ ही प्रशासनिक हस्तक्षेप भी बंद होना चाहिए। अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाया गया तो आने वाले समय में स्थिति और खराब हो सकती है।