Pam Oil: खाने तेल के मामले में कबतक हमारा देश आत्मनिर्भर बनेगा? सरकार की इसको लेकर पॉलिसी क्या है? खाने के तेल की तमाम पहलुओं पर सीएनबीसी-आवाज से विस्तार से बात करते हुए SD Guthrie International के CEO संदीप भान ने कहा कि छोटी अवधि में पाम की कीमतों में तेजी आई। तेजी के बाद भी मांग मजबूत बनी हुई है। भारत की मजबूत मांग से सपोर्ट मिल रहा है। आगे भी कीमतों को भारतीय मांग से सपोर्ट मिलेगा। अक्टूबर-नवंबर में पाम का उत्पादन गिरेगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में सप्लाई में गिरावट होगी। वायदा में फॉर्वर्ड मंथ प्रीमियम पर चल रहे हैं। आने वाले महीनों में कीमतें और चढ़ेंगी। 4500 रिंग्गित तक दाम चढ़ते दिख रहे हैं। पाम, सोया की बीच का अंतर घटा है। कीमतों में $75-80 की ही अंतर है।
डिमांड कैसी है? इस सवाल का जवाब देते हुए संदीप भान ने कहा कि इंडोनेशिया का टैक्स स्ट्रक्चर हर महीने बढ़ रहा है। कीमतों में तेजी से इंडोनेशिया का टैक्स स्ट्रक्चर बढ़ा। CPO की कीमतों में $25 की तेजी की उम्मीद है। मौजूदा ट्रेंड कायम रहा तो सितंबर में दाम और बढ़ेंगे। भारत से 8-9 लाख टन मांग बनी रहने की उम्मीद है। सोया के दाम बढ़ने से भारत के पास विकल्प सीमित है। अगले 3-4 महीनों के लिए भारत के पास विकल्प कम होगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में पाम की मांग बनी रहेगी। भारत, यूरोप में पाम ऑयल की मांग ज्यादा है। रिफाइंड प्रोडक्ट के लिए मलेशिया, इंडोनेशिया दुनिया पर निर्भर है। भारत में मांग बढ़ने से CPO की कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है। रिफाइनिंग इंडस्ट्री चुनौतियों का सामना कर रही है। बायो फ्यूल की वजह से रिफाइनिंग को सपोर्ट मिल रहा है। इंडोनेशिया B40 पर अच्छा का कर रहा है। चीन में भी खाने के तेल की मांग गिरी थी, अब बढ़ रही है।
पाम ऑयल की मांग फूड इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा है। 75% मांग फूड, 25% मांग बायो फ्यूल इंडस्ट्री से आता है। भारत में भी CPO, बाय प्रोडक्ट 80% फूड में जाता है।
संदीप भान ने बताया कि भारत में पाम ऑयल की मांग हर घर में है। रोज-मर्रा में खाई जाने वाली चीजों में पाम ऑयल का इस्तेमाल होता है।
संदीप भान ने बताया कि US बायो फ्यूल प्रोग्राम जल्द लागू करेगा। US की नीतियों से सोयाबीन ऑयल को सपोर्ट मिल रहा है। सोयाबीन में तेजी से भारत में पाम की मांग बढ़ी है। पाम की मांग बढ़ने में US टैरिफ की बड़ी भूमिका है इंडोनेशिया ने EU के साथ एक करार किया है। इंडोनेशिया पर EU भी टैरिफ की दर घटा सकता है। पाम ऑयल के लिए पहले 5 महीने काफी कठिन रहे। कीमतों में तेजी की वजह से पाम की मांग गिरी है।